बिहार में 1,670 एकड़ में बनेगी ग्रेटर नोएडा जैसी मैन्युफैक्चरिंग सिटी
गया के डोभी में 1,670 एकड़ पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी, निवेशकों के लिए भूमि आवंटन शुरू
देहरादून, 24 अक्टूबर 2026 | बिहार में औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। गया जिले के डोभी में 1,670 एकड़ जमीन पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) विकसित किया जा रहा है। इसे आधुनिक औद्योगिक सुविधाओं से लैस मैन्युफैक्चरिंग सिटी के रूप में तैयार करने की योजना है। 24 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस परियोजना के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया, जिसके साथ निवेशकों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई।
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) के अनुसार, परियोजना में करीब ₹16,524 करोड़ के निवेश की संभावना है और इसके पूरा विकसित होने पर लगभग 1,09,185 रोजगार के अवसर पैदा करने का अनुमान है। ये अनुमानित लक्ष्य हैं; वास्तविक निवेश और रोजगार परियोजनाओं के स्थापित होने के साथ तय होंगे।
2047 तक दुनिया के सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था
इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत की कल्पना करते हैं कि विकसित भारत बने और 2047 में दुनिया के सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था के साथ खड़ा हो सके। वो इसकी कल्पना करते हैं। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार को समृद्ध बिहार बनाना चाहते थे और उस सपने को साकार करने के लिए वो लोग लगातार काम कर रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर क्यों विकसित हो रहा औद्योगिक क्षेत्र?
इस मैन्युफैक्चरिंग सिटी का उद्देश्य अलग-अलग उद्योगों को एक ही स्थान पर आधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है। यहां औद्योगिक प्लॉट, सड़कें, बिजली, पानी, अपशिष्ट प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे कंपनियों को उत्पादन इकाइयां स्थापित करने में मदद मिलेगी और आसपास के क्षेत्रों में सहायक कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
परियोजना अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे का हिस्सा है। हालांकि, इसे ग्रेटर नोएडा की हूबहू प्रतिकृति के बजाय बिहार में आधुनिक औद्योगिक शहर विकसित करने की पहल के रूप में समझना बेहतर होगा।
किन उद्योगों को मिलेगा मौका?
योजना में कई क्षेत्रों की विनिर्माण इकाइयों को आकर्षित करने का लक्ष्य है। इनमें शामिल हैं:
- कृषि और खाद्य प्रसंस्करण
- भवन निर्माण सामग्री
- चमड़ा और चमड़े से बने उत्पाद
- रेडीमेड कपड़े
- इंजीनियरिंग और फैब्रिकेशन
- फर्नीचर निर्माण
- हथकरघा और हस्तशिल्प
- मेडिकल उपकरण
इन क्षेत्रों में निवेश आने से स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं, परिवहन, पैकेजिंग, मरम्मत सेवाओं और छोटे कारोबारों के लिए भी अवसर पैदा हो सकते हैं।
गया की लोकेशन से उद्योगों को क्या फायदा होगा?
डोभी में प्रस्तावित औद्योगिक शहर की खासियत इसकी सड़क, रेल और हवाई संपर्क व्यवस्था है। आधिकारिक परियोजना विवरण के अनुसार, यह गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करीब 30 किलोमीटर दूर है। राष्ट्रीय राजमार्ग-22 लगभग 2 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजमार्ग-19 करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है। इससे कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बिहार के साथ-साथ झारखंड के औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों से संपर्क के लिहाज से भी उपयोगी मानी जा रही है। बेहतर कनेक्टिविटी से कंपनियों की परिवहन लागत और लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियां कम करने की संभावना है।
रोजगार के कितने अवसर पैदा होने का अनुमान?
NICDC के परियोजना विवरण में लगभग 1,09,185 रोजगार अवसरों का अनुमान दिया गया है। इसमें करीब 51,993 प्रत्यक्ष और 57,192 अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं। आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, यह रोजगार क्षमता वर्ष 2039 तक विकसित होने की संभावना है।
प्रत्यक्ष रोजगार में फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। वहीं, परिवहन, वेयरहाउसिंग, खानपान, पैकेजिंग, सुरक्षा और अन्य सेवाओं के जरिए अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकता है।
हालांकि, इतने बड़े स्तर पर रोजगार सृजन तभी संभव होगा, जब परियोजना में पर्याप्त कंपनियां निवेश करें, उत्पादन शुरू करें और स्थानीय युवाओं को जरूरी कौशल का प्रशिक्षण मिले।
पर्यावरण और आधुनिक सुविधाओं पर भी जोर
औद्योगिक शहर में उत्पादन गतिविधियों के साथ पर्यावरण प्रबंधन की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। आधिकारिक परियोजना जानकारी के अनुसार, साझा अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (CETP), जल निकासी, ठोस कचरा प्रबंधन और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य औद्योगिक गतिविधियों से पैदा होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना और इकाइयों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में मदद देना है। परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी भी मिल चुकी है।
गया की मैन्युफैक्चरिंग सिटी बिहार की व्यापक औद्योगिक विकास योजना का हिस्सा है। उद्योग विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 से अब तक राज्य को 1,091 निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनकी प्रस्तावित कुल राशि ₹1,21,863 करोड़ बताई गई है। इन प्रस्तावों से 68,807 से अधिक रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान है। ध्यान रहे, ये निवेश प्रस्ताव हैं; इन्हें वास्तविक रूप से शुरू हो चुके निवेश या तैयार नौकरियों के बराबर नहीं माना जा सकता।
राज्य में अन्य औद्योगिक परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। इनमें मुजफ्फरपुर में मेगा फूड पार्क, महवल-मोतीपुर में चमड़ा और फुटवियर क्लस्टर, फतुहा में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की पहल शामिल है।
क्या बिहार के युवाओं को मिलेगा पलायन से राहत का विकल्प?
बिहार से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। ऐसे में गया में औद्योगिक शहर विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। यदि कंपनियां तय समय पर स्थापित होती हैं और स्थानीय युवाओं को उनकी जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण मिलता है, तो यह परियोजना रोजगार के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम करने में योगदान दे सकती है।
फिलहाल परियोजना की वास्तविक सफलता निवेशकों की भागीदारी, भूमि आवंटन के बाद औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और रोजगार सृजन की गति पर निर्भर करेगी। 1,670 एकड़ में विकसित होने वाली यह मैन्युफैक्चरिंग सिटी बिहार को विनिर्माण क्षेत्र में आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल है।