नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026 | यूरोपीय देश अल्बानिया में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजधानी तिराना में छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर रखी कुर्सियों को आग लगा दी गई। ये कुर्सियां प्रधानमंत्री एदी रामा ने सरकार के साथ बातचीत के निमंत्रण के तौर पर रखवाई थीं। प्रदर्शनकारियों ने इस कदम को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। 25 अक्टूबर 2026 को हुए इस प्रदर्शन के बाद देश में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
अल्बानिया में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर रखी कुर्सियों में आग लगा दी। प्रधानमंत्री एडी रामा ने छात्रों से बातचीत करने के लिए ये कुर्सियां और पत्थर की एक बड़ी मेज रखवाई थी। कुर्सियों पर ‘डायलॉग’ यानी बातचीत लिखा था, लेकिन छात्रों ने बातचीत के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने कुर्सियों पर ‘इस्तीफा’ लिखकर अपना विरोध जताया।
राजधानी तिराना में छात्र और युवा पिछले 13 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को प्रदर्शनकारी पहले शिक्षा मंत्रालय के बाहर जुटे। यहां उन्होंने कुछ देर तक प्रदर्शन किया और इमारत पर पत्थर भी फेंके। इसके बाद वे प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर बढ़ गए और वहां रखी कुर्सियों में आग लगा दी।
भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था पर नाराजगी
अल्बानिया में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के पीछे कई मुद्दे हैं। प्रदर्शनकारी सरकारी भ्रष्टाचार की आशंकाओं, रोजगार के सीमित अवसरों और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।
छात्रों की मांगों में शिक्षा पर अधिक सरकारी खर्च, विश्वविद्यालयों की स्थिति में सुधार और युवाओं के लिए बेहतर भविष्य के अवसर शामिल हैं। आंदोलन अब राजधानी तिराना से आगे दूसरे शहरों तक भी फैल चुका है।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार ने उठाए कदम
प्रदर्शन के दौरान कुछ सरकारी इमारतों और बैंकों को निशाना बनाए जाने, दुकानों के शीशे तोड़े जाने और पुलिस के साथ झड़पों की खबरें सामने आई हैं। पुलिस ने हालात नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की है।
प्रधानमंत्री रामा ने 25 अक्टूबर को हिंसा रोकने के लिए नए उपायों की घोषणा की। इनमें ऐसी प्रदर्शन रैलियों में शामिल होने वालों पर 5 लाख लेक तक जुर्माने का प्रस्ताव शामिल है, जो हिंसक हो जाती हैं। इस प्रस्ताव के तहत उन लोगों पर भी जुर्माना लग सकता है जो खुद हिंसा में शामिल न हों, लेकिन हिंसक प्रदर्शन का हिस्सा हों।
प्रधानमंत्री एदी रामा के सामने बढ़ी चुनौती
एदी रामा वर्ष 2013 से अल्बानिया की सत्ता में हैं और पिछले साल चौथी बार प्रधानमंत्री बने थे। मौजूदा छात्र आंदोलन उनकी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
रामा ने अपने बयान में कहा कि हिंसा के जरिए इस्तीफा थोपने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि प्रदर्शनकारियों की हर मांग गलत नहीं है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी सरकार से जवाबदेही और राजनीतिक बदलाव की मांग कर रहे हैं।