दिल्ली हाई कोर्ट: अचानक जानवर सामने आने पर ड्राइवर को दोषी नहीं ठहरा सकते

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026 | दिल्ली हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि सड़क पर अचानक आवारा जानवर आ जाने का हवाला देकर ड्राइवर अपनी लापरवाही से पूरी तरह पल्ला नहीं झाड़ सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि वाहन चलाते समय सड़क पर संभावित खतरों के प्रति सतर्क रहना और गाड़ी पर नियंत्रण बनाए रखना ड्राइवर की जिम्मेदारी है। जस्टिस अनिश दयाल की पीठ ने ICICI Lombard General Insurance Company की अपील खारिज करते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए करीब 1.70 करोड़ रुपये के मुआवजे और 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के आदेश को बरकरार रखा।

जस्टिस अनीश दयाल ने कहा कि ड्राइवरों को सतर्क रहना चाहिए और गाड़ी की स्पीड पर नियंत्रण रखना चाहिए। हादसा 28 मई 2014 को वसंत कुंज में छतरपुर मेट्रो स्टेशन के पास हुआ था। कुत्ते से बचने की कोशिश में मर्सिडीज डिवाइडर से टकरा गई थी। पिछली सीट पर बैठे सतीश चंद्र गुप्ता के दिमाग में गंभीर चोट आई। छह साल से अधिक समय कोमा में रहने के बाद 2020 में उनकी मौत हो गई।

कुत्ते को बचाने के प्रयास में डिवाइडर से टकराई कार

यह मामला 28 मई 2014 की सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। सतिश चंद्र गुप्ता दिल्ली में एक कार की पिछली सीट पर यात्रा कर रहे थे। कार संजय भाटी चला रहे थे। रास्ते में अचानक एक कुत्ता सामने आ गया। उसे बचाने के प्रयास में ड्राइवर ने कार मोड़ी, लेकिन वाहन सड़क के डिवाइडर से टकरा गया।

इस दुर्घटना में गुप्ता को गंभीर चोटें आईं। उन्हें हाइपॉक्सिक-इस्केमिक एन्सेफैलोपैथी नामक गंभीर मस्तिष्क संबंधी क्षति हुई और वह 22 अगस्त 2020 तक कोमा में रहे, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद मुआवजे को लेकर कानूनी विवाद जारी रहा।

बीमा कंपनी ने क्यों दी थी चुनौती?

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 26 मई 2016 को पीड़ित के पक्ष में 1,70,86,530 रुपये का मुआवजा और उस पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया था। ICICI Lombard General Insurance Company ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी।

बीमा कंपनी ने दुर्घटना में ड्राइवर की लापरवाही और बीमा पॉलिसी के तहत अपनी जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। उसने यह भी विवाद किया कि दुर्घटना के समय गुप्ता कार में यात्री थे या खुद गाड़ी चला रहे थे। कंपनी की दलील थी कि ड्राइवर ने कुत्ते को बचाने के लिए अचानक कदम उठाया था, इसलिए उसे लापरवाही के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

‘अचानक खतरा’ ड्राइवर को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता

हाई कोर्ट ने ‘एगोनी ऑफ द मोमेंट’ यानी अचानक खतरे की स्थिति में तत्काल निर्णय लेने के सिद्धांत पर विचार किया। इस सिद्धांत के तहत माना जाता है कि अचानक पैदा हुई आपात स्थिति में किसी व्यक्ति से हर बार बिल्कुल सही निर्णय लेने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

हालांकि, अदालत ने कहा कि आवारा जानवर के अचानक सामने आने की स्थिति में इस सिद्धांत को यांत्रिक तरीके से लागू करके ड्राइवर को लापरवाही की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता। ड्राइवर को सड़क पर संभावित खतरों का अनुमान लगाना चाहिए और वाहन की गति, नियंत्रण तथा अपनी सतर्कता का ध्यान रखना चाहिए।

अदालत के अनुसार, तेज रफ्तार, सड़क पर पर्याप्त ध्यान न देना या खतरे का समय रहते अनुमान नहीं लगा पाना भी लापरवाही के आकलन में महत्वपूर्ण हो सकता है। हर दुर्घटना में जिम्मेदारी तय करते समय उसके वास्तविक हालात और उपलब्ध साक्ष्यों को देखना जरूरी है।

अदालत ने माना- गुप्ता पिछली सीट पर बैठे थे

बीमा कंपनी ने यह भी दावा किया था कि गुप्ता कार में यात्री नहीं, बल्कि वाहन चला रहे थे। हाई कोर्ट ने इस दलील पर विचार करते हुए एंबुलेंस चालक की गवाही, कार चालक के बयान और डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट सहित उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया।

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि गुप्ता कार की पिछली सीट पर बैठे थे। बीमा कंपनी यह भी साबित नहीं कर सकी कि गुप्ता उस कंपनी के कर्मचारी थे, जिसके नाम पर कार थी। अदालत ने संबंधित व्यापक या पैकेज बीमा पॉलिसी के तहत उन्हें कवर माना।

बीमा कंपनी को बाकी मुआवजा जमा करने का निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी और मुआवजे के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी मुआवजे की शेष 50 प्रतिशत राशि और उस पर जमा ब्याज अदालत में जमा करे, ताकि यह रकम गुप्ता के कानूनी उत्तराधिकारियों को एकमुश्त जारी की जा सके।

इस फैसले से स्पष्ट होता है कि सड़क पर अचानक जानवर या कोई अन्य बाधा सामने आने से ड्राइवर अपने आप लापरवाही के आरोप से मुक्त नहीं हो जाता। हालांकि, इसका अर्थ यह भी नहीं है कि हर ऐसी दुर्घटना में ड्राइवर स्वतः दोषी होगा। जिम्मेदारी का फैसला दुर्घटना की परिस्थितियों, ड्राइविंग के तरीके और उपलब्ध सबूतों के आधार पर किया जाएगा।

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