श्री सनातन धर्म लीला समिति करोल बाग की रामलीला का भव्य समापन

37 वर्षों से करोल बाग में रामलीला के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार कर रही है समिति

  • भरत मिलाप और श्रीराम के राज्याभिषेक ने मोहा मन

नई दिल्ली। श्री सनातन धर्म लीला समिति, करोल बाग द्वारा श्री राम वाटिका, अजमल खां पार्क, करोल बाग में आयोजित रामलीला का समापन भरत मिलाप, अयोध्यावासियों के मंगल महोत्सव और भगवान श्रीराम के भव्य राज्याभिषेक के साथ हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भगवान श्रीराम तथा भरत मिलाप की भावपूर्ण लीला का दर्शन कर भाव-विभोर हो गए।

लीला के दौरान भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन, भरत मिलाप और राज्याभिषेक के प्रसंगों का सुंदर मंचन किया गया। श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयघोष के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में आयोजित आकर्षक आतिशबाजी ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। रंग-बिरंगी आतिशबाजी और भव्य आयोजन ने समारोह की शोभा को और बढ़ा दिया।

रामलीला के सफल आयोजन एवं समापन में समिति के चेयरमेन अशोक गुप्ता, अध्यक्ष अशोक कपूर, महामंत्री बिशन स्वरूप गुप्ता, कोषाध्यक्ष सलेकचंद गुप्ता तथा मंत्री प्रवीन कपूर सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

उल्लेखनीय है कि श्री सनातन धर्म लीला समिति पिछले 37 वर्षों से लगातार करोल बाग क्षेत्र में रामलीला का सफल आयोजन करती आ रही है। समिति का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, सत्य, त्याग और धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। समिति के निरंतर प्रयासों से क्षेत्र में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिल रहा है।

इस प्रकार भक्ति, उत्साह और धार्मिक उल्लास से परिपूर्ण वातावरण में रामलीला का समापन हुआ। आयोजन ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

समिति के मंत्री प्रवीन कपूर ने बताया कि श्री सनातन धर्म लीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला के उत्कृष्ट मंचन को गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी एनबीटी दशहरा नवभारत टाइम्स द्वारा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि समिति रामलीला के मंचन को हर वर्ष और अधिक भव्य, आकर्षक एवं भावपूर्ण बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए समिति कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों, मर्यादा, त्याग और सनातन संस्कृति के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय समिति के सभी पदाधिकारियों, कलाकारों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों को दिया।

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