अकाल तख्त के फैसले पर घिरे भगवंत मान: कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा, पंजाब की राजनीति में मचा बवाल

अमृतसर, 16 जून्‌ 2026 । पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर बड़ा धार्मिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अकाल तख्त ने उन्हें “गुरु दोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित किया है। यह फैसला एक विवादित वीडियो और उससे जुड़े घटनाक्रम के बाद लिया गया, जिसके कारण पंजाब की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

अकाल तख्त की ओर से यह भी घोषणा की गई कि पंजाब के सभी सिख विधायक, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से हों, तथा राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेश हों। उन पर नए जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 को पारित कर सिख पंथ की भावनाओं और हितों को आहत करने का आरोप लगाया गया है।

जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा कि दो सरकारी मान्यता प्राप्त फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की जांच में यह वायरल वीडियो न तो एआई से बनाया गया और न ही उसके साथ कोई छेड़छाड़ की गई। उनके अनुसार दोनों रिपोर्टों में वीडियो को पूरी तरह प्राकृतिक और वास्तविक बताया गया है। अकाल तख्त ने राज्य सरकार द्वारा पारित जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 के कुछ प्रावधानों पर भी कड़ा विरोध जताया। जत्थेदार गर्गज ने इसे पहले भी काला कानून बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की थी।

इस फैसले के बाद कांग्रेस और भाजपा समेत विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि अकाल तख्त जैसे सर्वोच्च सिख धार्मिक संस्थान द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद भगवंत मान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।

वहीं आम आदमी पार्टी ने पूरे विवाद को राजनीतिक साजिश करार दिया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि शिरोमणि अकाली दल और बादल परिवार धार्मिक संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं। AAP का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति भगवंत मान हैं, यह अब भी साबित नहीं हुआ है और जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।

इस विवाद ने आगामी चुनावी माहौल से पहले पंजाब की राजनीति को गरमा दिया है। धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और सरकार के बीच बढ़ता टकराव आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

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