TMC में संभावित टूट से बदल सकते हैं संसदीय समीकरण: NDA की ताकत बढ़ने की चर्चाओं ने पकड़ा जोर

नई दिल्ली/कोलकाता, 15 जून्‌ 2026 । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संभावित टूट और असंतोष की खबरों के बीच राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि यदि TMC के कुछ सांसद या नेता पार्टी से अलग रास्ता अपनाते हैं, तो इसका सीधा असर संसद में विपक्षी एकजुटता और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति पर पड़ सकता है।

18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव और TMC सांसदों के संभावित इस्तीफों के बाद उच्च सदन में NDA का आंकड़ा 148 से बढ़कर 154 तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए NDA को लोकसभा में 46 और राज्यसभा में 9 सीटों की जरूरत रहेगी।

उधर, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को दावा किया, ‘गृहमंत्री अमित शाह ने इन सांसदों के गैर-कानूनी तौर पर अलग होने की साज़िश रची थी। यह अजीब कदम लोकसभा में NDA के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की उनकी रणनीति का हिस्सा है।’

दरअसल, बजट सत्र के दौरान सरकार परिसीमन बिल के लिए संविधान संशोधन बिलों को लोकसभा में पास नहीं करा पाई थी। भाजपा की इन कोशिशों को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि संसद में संख्या बल किसी भी सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि TMC के सांसदों की संख्या में कमी आती है या कुछ सांसद NDA के समर्थन में खड़े होते हैं, तो इससे केंद्र सरकार को विधायी कार्यों और महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने में अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है। हालांकि फिलहाल इस तरह की चर्चाओं को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की प्रमुख आवाजों में शामिल रही है। पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee और उनके सांसद संसद में केंद्र सरकार की नीतियों पर मुखर रुख अपनाते रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की राजनीतिक हलचल को राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि दल-बदल, आंतरिक असंतोष और नेतृत्व संबंधी मतभेद भारतीय राजनीति का हिस्सा रहे हैं, लेकिन किसी बड़े दल में टूट की स्थिति बनने पर उसके प्रभाव राज्य की सीमाओं से बाहर जाकर राष्ट्रीय स्तर तक दिखाई देते हैं। आने वाले समय में TMC के भीतर की स्थिति और सांसदों के रुख पर सभी की नजर बनी रहेगी, क्योंकि इससे संसद के शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।

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