नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में केप वर्डे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2010 फीफा विश्व कप विजेता स्पेन को ड्रॉ पर रोक दिया। मुकाबले से पहले स्पेन को स्पष्ट रूप से मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन केप वर्डे की अनुशासित रणनीति और दमदार रक्षात्मक खेल ने स्पेनिश टीम को जीत से वंचित कर दिया।
अटलांटा स्टेडियम में मंगलवार को ग्रुप-एच के पहले मैच में स्पेन का दबदबा रहा, लेकिन 2010 की वर्ल्ड चैंपियन स्पेन केप वर्डे के 40 साल के गोलकीपर वोजिन्या और मजबूत डिफेंस को भेद नहीं सकी। उसने 74% बॉल पोजेशन रखा और 27 शॉट लगाए, लेकिन गोल नहीं आया।
दूसरी ओर फ्लोरिडा के मियामी स्टेडियम में उरुग्वे ने गोल करने के 29 प्रयास किए। इनमें से 11 टारगेट पर थे। लेकिन, सऊदी अरब के गोलकीपर मोहम्मद अल-ओवैस ने 10 मौकों पर सफल बचाव किया और टीम के लिए एक अंक हासिल किया।
मैच के दौरान स्पेन ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाए रखा और कई आक्रमण किए, लेकिन केप वर्डे के खिलाड़ियों ने बेहतरीन सामूहिक खेल का प्रदर्शन करते हुए हर चुनौती का मजबूती से सामना किया। गोलकीपर और डिफेंस लाइन ने विशेष रूप से प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिसके चलते स्पेन अपने मौके भुनाने में सफल नहीं हो सका।
मैच में खास
- वर्ल्ड कप में डेब्यू कर रही केप वर्डे ने अपने पहले ही मैच में यूरो 2024 चैंपियन स्पेन को ड्रॉ पर रोक दिया।
- 40 साल के गोलकीपर वोजिन्या ने 7 शानदार सेव कर स्पेन को गोल से दूर रखा।
- स्पेन ने 27 शॉट लगाए, लेकिन एक भी गोल नहीं कर सकी। यह वर्ल्ड कप इतिहास में उसके सबसे निराशाजनक आक्रामक प्रदर्शनों में से एक रहा।
इस परिणाम को केप वर्डे के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अपेक्षाकृत छोटी फुटबॉल ताकत मानी जाने वाली टीम ने दुनिया की प्रतिष्ठित टीमों में से एक के खिलाफ अंक हासिल कर अपनी क्षमता का परिचय दिया है। वहीं स्पेन के लिए यह नतीजा निराशाजनक माना जा रहा है, क्योंकि टीम को जीत की उम्मीद थी।
फुटबॉल विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक फुटबॉल में छोटी और उभरती टीमें भी अब बड़ी टीमों को कड़ी चुनौती देने लगी हैं। केप वर्डे का यह प्रदर्शन इसी बदलते वैश्विक फुटबॉल परिदृश्य का उदाहरण माना जा रहा है। इस ड्रॉ के बाद दोनों टीमों के प्रदर्शन पर प्रशंसकों और विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।