नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में हरियाणा बना देश का नंबर-1 राज्य, न्याय व्यवस्था में स्थापित किया नया मानक

चंडीगढ़, 16 जून्‌ 2026 । हरियाणा ने नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में देशभर में अग्रणी स्थान हासिल करते हुए न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में नई मिसाल पेश की है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के समन्वित प्रयासों के चलते भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रावधानों को तेजी से लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप हरियाणा को देश में प्रथम स्थान प्राप्त होने की जानकारी सामने आई है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई राज्यस्तरीय बैठक में यह जानकारी दी गई। डीजीपी अजय सिंघल ने बताया कि हरियाणा 7 जून 2026 से राष्ट्रीय नए आपराधिक कानून डैशबोर्ड पर प्रथम स्थान पर है। केंद्र ने आईसीजेएस 2.0 को मजबूत करने के लिए 34 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।

बैठक में बताया गया कि हरियाणा पुलिस नागरिक केंद्रित सेवाओं के क्षेत्र में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है और हरसमय पोर्टल के माध्यम से राइट टू सर्विस (आरटीएस) डैशबोर्ड पर 10 में से 10 अंक प्राप्त कर रही है। निर्धारित समय-सीमा के भीतर 88.84 लाख से अधिक नागरिक आवेदनों का निपटान किया गया, जिससे हरियाणा पुलिस राज्य के सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक सेवा प्रदाता विभागों में शामिल हो गई है।

राज्य में नए कानूनों को लागू करने के लिए पुलिस अधिकारियों, अभियोजन अधिकारियों और न्यायिक तंत्र से जुड़े कर्मचारियों को व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। डिजिटल तकनीकों के उपयोग, ई-साक्ष्य प्रबंधन, ऑनलाइन केस ट्रैकिंग और आधुनिक जांच प्रणाली को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। इससे मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने में मदद मिली है।

सरकार का दावा है कि नए आपराधिक कानूनों के तहत अपराधों की जांच में तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग बढ़ा है, जिससे मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज हुई है। साथ ही पीड़ित-केंद्रित न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से अपराध नियंत्रण और न्याय वितरण प्रणाली दोनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नए आपराधिक कानूनों का उद्देश्य औपनिवेशिक दौर के पुराने कानूनों की जगह आधुनिक, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित न्याय प्रणाली विकसित करना है। हरियाणा का प्रदर्शन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

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