चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में बढ़ी हलचल, चन्नी की सक्रियता से हाईकमान की चिंता बढ़ी

चंडीगढ़, 08  जुलाई 2026 । पंजाब कांग्रेस में चुनावी तैयारियों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की बढ़ती सक्रियता और लगातार जनसंपर्क अभियानों को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई राजनीतिक विश्लेषक उनकी मौजूदा शैली की तुलना नवजोत सिंह सिद्धू की आक्रामक राजनीतिक शैली से कर रहे हैं, हालांकि यह तुलना राजनीतिक विश्लेषण का हिस्सा है।

कांग्रेस हाईकमान ने की थी संतुलन बनाने की कोशिश

कांग्रेस नेतृत्व ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की थी। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया जबकि चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, माना जा रहा है कि चन्नी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी चाहते थे और फैसला उनके पक्ष में नहीं जाने के बाद उनकी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

कांग्रेस हाईकमान ने की थी संतुलन बनाने की कोशिश

कांग्रेस नेतृत्व ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की थी। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया जबकि चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, माना जा रहा है कि चन्नी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी चाहते थे और फैसला उनके पक्ष में नहीं जाने के बाद उनकी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

चन्नी लगातार कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच सक्रिय नजर आ रहे हैं। उनकी सार्वजनिक बैठकों, बयानों और शक्ति प्रदर्शन को पंजाब कांग्रेस के भीतर उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे पार्टी संगठन और नेतृत्व के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ती दिखाई दे रही है।

कांग्रेस हाईकमान पंजाब इकाई में एकजुटता बनाए रखने की कोशिश में जुटा है। आगामी चुनावों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व किसी भी प्रकार की गुटबाजी या अंदरूनी मतभेद को बढ़ने नहीं देना चाहता। इसी कारण वरिष्ठ नेताओं के लगातार संवाद और बैठकों का दौर जारी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब में कांग्रेस की चुनावी रणनीति और नेतृत्व की दिशा आने वाले समय में और स्पष्ट होगी। फिलहाल चन्नी की सक्रियता और संगठन के भीतर की गतिविधियां राज्य की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं।

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