पटना, 10 जुलाई 2026 । बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। यह सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मजबूत गढ़ रही है और वरिष्ठ नेता नितिन नवीन का प्रभाव यहां प्रमुख रहा है। हालांकि, इस बार उपचुनाव में बदलते राजनीतिक समीकरणों और नए चेहरों की मौजूदगी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।
निशाने पर बीजेपी का आधार वोट
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अपना आधार वोट बचाने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी बीजेपी के रणनीतिकारों के जिम्मे आ गई है। ऐसा नहीं कि भाजपा ने इस खतरे को पहले नहीं झेला है। पिछले चुनाव में ही वैश्य समाज का वोट बचाने के खतरे से बीजेपी के रणनीतिकारों को जूझना पड़ा था। लेकिन वर्तमान उप चुनाव में यह खतरा काफी बड़ा है। इस चुनाव में वैश्य के साथ साथ सवर्ण वोटों के बिखराव का भी खतरा मंडरा रहा है। पिछले चुनाव में नितिन नवीन जैसे दिग्गज के रहते राजद के उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 46 हजार से ज्यादा वोट केवल MY के तो नहीं थे। इस में एक बड़ा वोट वैश्य समाज का भी शामिल रहा होगा।
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की सक्रियता ने इस सीट पर चुनावी चर्चा को नई दिशा दी है। वहीं, विभिन्न दलों की ओर से संभावित उम्मीदवारों के रूप में रेखा गुप्ता और अभिषेक बंटी के नाम भी चर्चा में हैं। ऐसे में सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
बांकीपुर सीट का चुनावी गणित भी काफी दिलचस्प माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यहां करीब 33 प्रतिशत वोट बैंक चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि सभी दल इस वर्ग को साधने के लिए अलग-अलग रणनीतियां बना रहे हैं। जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ स्थानीय विकास, संगठन की मजबूती और उम्मीदवार की लोकप्रियता भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उपचुनाव के नतीजे केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें बिहार की बदलती राजनीति और आगामी चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत माना जाएगा। ऐसे में सभी दलों की नजर इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हुई है।