कोलकाता, 20 मई 2026 । पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर बड़ा मुद्दा सामने आया है। राज्य में OBC आरक्षण 17 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत होने की खबर के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस फैसले का असर सरकारी नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े हजारों उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। नई लिस्ट के मुताबिक अब सिर्फ 66 जातियां OBC आरक्षण के दायरे में रहेंगी। धर्म आधारित वर्गीकरण की व्यवस्था भी खत्म कर दी गई है।
अब इन्हें मिलेगा आरक्षण
नई लिस्ट में कपाली, कुर्मी, सुध्राधार, कर्मकार, सूत्रधार, स्वर्णकार, नाई, तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा, देवांग और गोआला जैसी जातियां शामिल हैं। पहाड़िया, हज्जाम और चौधुली जैसे तीन मुस्लिम समुदाय भी इस लिस्ट में हैं।
राज्य मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि सरकार OBC ढांचे की नई समीक्षा करेगी। इसके लिए जांच समिति बनाई जाएगी। जिन समूहों की पहचान हाईकोर्ट ने स्पष्ट की है, उन पर पहले विचार होगा। समीक्षा के बाद जरूरत पड़ने पर कुछ समूहों को कानूनी प्रक्रिया के तहत फिर सूची में शामिल किया जा सकता है।
मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार की ओर से कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा है। इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
जानकारों के अनुसार, आरक्षण से जुड़े नियमों और अदालतों में चल रही सुनवाई के कारण यह स्थिति बनी है। कुछ वर्गों को OBC सूची से बाहर किए जाने और नई पात्रता शर्तों को लेकर भी चर्चा हो रही है। इससे कई अभ्यर्थियों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों ने भी इस बदलाव पर प्रतिक्रिया दी है। कई संगठनों का कहना है कि आरक्षण में कमी से पिछड़े वर्गों के युवाओं के अवसर प्रभावित हो सकते हैं, जबकि कुछ लोग इसे कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप आवश्यक कदम बता रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील बनता जा रहा है। आने वाले समय में इस विषय पर अदालत, सरकार और राजनीतिक दलों के बीच बहस और तेज होने की संभावना है।