विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में BJP का नशे के खिलाफ अभियान तेज

चंडीगढ़,19 अक्टूबर 2026 ।  पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 अक्टूबर 2026 को पंजाब के दौरे पर आ रहे हैं। यह सितंबर के अंत में जालंधर में आयोजित कार्यक्रम के बाद एक महीने से भी कम समय में उनका दूसरा पंजाब दौरा होगा। इस दौरान वह नशे से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से मुलाकात करेंगे। भाजपा इस दौरे के जरिए राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरने की तैयारी में है।

नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिलेंगे शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पंजाब दौरे की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वह उन परिवारों से मुलाकात करेंगे, जिन्होंने पंजाब में नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण अपने प्रियजनों को खो दिया। शाह के मुताबिक, वह 20 अक्टूबर को मानसा, संगरूर और गुरदासपुर का दौरा करेंगे। इस दौरान वह परविंदर सिंह झोटा, गुलजार सिंह और बिक्रमजीत सिंह के परिजनों से मिलेंगे। इन लोगों ने पंजाब में सिंथेटिक ड्रग्स की आसानी से उपलब्धता और नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाई थी।

केंद्र ने पंजाब सरकार से मांगी रिपोर्ट

पंजाब में नशे से जुड़े मामलों और नशे के कारोबार का विरोध करने वालों की मौत को लेकर केंद्र सरकार ने भी संज्ञान लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव को अलग-अलग पत्र भेजकर हालिया घटनाओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है।

इन घटनाओं ने राज्य में नशे के नेटवर्क, स्थानीय स्तर पर कार्रवाई और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन मामलों में जांच और कार्रवाई को लेकर क्या जानकारी केंद्र के साथ साझा करती है।

2027 के चुनाव से पहले नशा बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। चुनाव से पहले भाजपा नशे की समस्या को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा रही है। वहीं, नशे के खिलाफ कार्रवाई, तस्करी पर नियंत्रण और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने जैसे मुद्दे राजनीतिक चर्चा में प्रमुखता से उठ रहे हैं।

अमित शाह का आगामी दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब नशे से जुड़े मामलों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच बयानबाजी तेज है। इस दौरे में पीड़ित परिवारों से मुलाकात और भाजपा के संदेश पर राजनीतिक नजरें रहेंगी। हालांकि, चुनावी आरोपों से अलग नशे की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी जांच, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार जैसे कदम भी महत्वपूर्ण होंगे।

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