दिल्ली की सड़कों पर अब अधिकतम 2.5 लाख ई-रिक्शे चलाने का प्रस्ताव

नई दिल्ली,19 अक्टूबर 2026 | दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम और बेतरतीब तरीके से चल रहे ई-रिक्शों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने नई योजना का मसौदा जारी किया है। इसके तहत राजधानी में अधिकतम 2.5 लाख ई-रिक्शे चलाने की सीमा प्रस्तावित की गई है। सरकार का कहना है कि इससे यातायात व्यवस्था सुधारने, सड़क सुरक्षा बढ़ाने और अनधिकृत वाहनों पर नियंत्रण करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह अभी प्रस्तावित नीति है, इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। सरकार ने मसौदे पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं।

सरकार ने जारी किया ड्राफ्ट, चार सवारी ही ले जा सकेंगे

ई-रिक्शा में चालक के अलावा अधिकतम चार यात्री और कुल 40 किलो तक सामान ले जाने की अनुमति होगी। ड्राफ्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति अधिकतम पांच ई-रिक्शा अपने नाम पर रजिस्टर करा सकेगा। किसी संस्था के नाम पर अधिकतम 100 ई-रिक्शा रजिस्टर हो सकेंगे। ड्राफ्ट में बिना रजिस्ट्रेशन चलने वाले ई-रिक्शा को जब्त करने और वापस नहीं लौटाने का प्रावधान रखा गया है।

दिल्ली में ई-रिक्शों की संख्या पर क्यों लगाई जा रही सीमा?

दिल्ली में ई-रिक्शे मेट्रो स्टेशन, बाजारों और आवासीय इलाकों में कम दूरी का सफर करने का प्रमुख साधन बन चुके हैं। लेकिन इनकी बढ़ती संख्या और अनियमित संचालन के कारण कई जगह जाम, गलत पार्किंग और सड़क सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की मई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 2,05,665 ई-रिक्शे पंजीकृत थे, जबकि परिवहन विभाग के अधिकारियों ने अनधिकृत वाहनों की संख्या भी बड़ी होने का अनुमान जताया था। सरकार का प्रस्तावित कदम पंजीकरण और संचालन को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की कोशिश है।

2.5 लाख की सीमा के बाद नए पंजीकरण पर रोक

प्रस्तावित दिल्ली ई-रिक्शा (पंजीकरण और संचालन) योजना, 2026 के अनुसार, राजधानी में ई-रिक्शों की कुल संख्या 2.5 लाख तक सीमित रखने का प्रावधान है। यह सीमा पूरी होने के बाद नए पंजीकरण जारी नहीं किए जाएंगे, जब तक सरकार इसे संशोधित नहीं करती।

इसका उद्देश्य वाहनों की अनियंत्रित बढ़ोतरी को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि सड़क पर चलने वाले ई-रिक्शे निर्धारित नियमों के अनुरूप हों। हालांकि, जाम में कितनी कमी आएगी, इसका आकलन नीति लागू होने और उसके प्रभाव की समीक्षा के बाद ही किया जा सकेगा।

हर ई-रिक्शे के लिए डिजिटल अनुपालन प्रमाणपत्र

मसौदे में केवल वाहन का पंजीकरण पर्याप्त नहीं माना गया है। प्रस्ताव के मुताबिक, प्रत्येक ई-रिक्शे के पास वैध ई-रिक्शा कंप्लायंस सर्टिफिकेट (ECC) होना चाहिए। यह डिजिटल प्रमाणपत्र दो साल तक वैध रहेगा और इसमें वाहन, मालिक, अधिकृत चालक, फिटनेस तथा बीमा से जुड़ी जानकारी दर्ज होगी।

मौजूदा पंजीकृत ई-रिक्शों को भी योजना अधिसूचित होने के बाद निर्धारित अवधि में जरूरी अनुपालन पूरा करना होगा। मसौदे में इसके लिए 90 दिनों का समय प्रस्तावित किया गया है।

एक व्यक्ति अधिकतम पांच ई-रिक्शे रख सकेगा

प्रस्तावित नियमों के तहत दिल्ली का निवासी व्यक्ति अधिकतम पांच ई-रिक्शों का मालिक हो सकेगा। वहीं, कंपनियों, फर्मों, सहकारी समितियों और अन्य निर्धारित संस्थाओं को शर्तों के अधीन अधिकतम 100 ई-रिक्शे रखने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

जिन बेड़ा संचालकों के पास 25 या उससे अधिक ई-रिक्शे होंगे, उन्हें एग्रीगेटर लाइसेंस लेना पड़ सकता है। इसके साथ ही चालक के पास वैध ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस और पब्लिक सर्विस व्हीकल (PSV) बैज होना जरूरी होगा।

चार यात्रियों से ज्यादा बैठाने की अनुमति नहीं

मसौदे में यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक ई-रिक्शे में चालक के अलावा अधिकतम चार यात्रियों को बैठाने का प्रावधान है। सामान का वजन 40 किलोग्राम तक सीमित रखने का प्रस्ताव भी शामिल है। वाहन में खड़े होकर यात्रा करने और चालक की सीट पर किसी यात्री को बैठाने की अनुमति नहीं होगी।

इसके अलावा, ई-रिक्शों को यातायात नियमों का पालन करना होगा और ऐसे स्थान पर पार्क करना होगा जहां पैदल यात्रियों या अन्य वाहनों की आवाजाही बाधित न हो। बैटरी सुरक्षा, फिटनेस और अधिकृत तरीके से पुरानी बैटरियों के निपटान से जुड़े नियम भी प्रस्तावित हैं।

नियम तोड़ने पर जब्ती और सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव

प्रस्तावित योजना में बिना जरूरी पंजीकरण या वैध अनुपालन प्रमाणपत्र के चलने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। नियमों के अनुसार, ऐसे ई-रिक्शों को जब्त किया जा सकता है। कुछ उल्लंघनों के मामलों में जब्त वाहनों की नीलामी या अन्य निर्धारित कार्रवाई का प्रस्ताव भी शामिल है।

मौजूदा ई-रिक्शा मालिकों और चालकों को इसलिए अंतिम नीति जारी होने के बाद लागू नियमों, दस्तावेजों और समय-सीमा की जानकारी ध्यान से देखनी होगी। अभी मसौदे पर सुझाव मांगे गए हैं, इसलिए प्रस्तावित प्रावधानों को पहले से लागू अंतिम नियम नहीं समझना चाहिए।

क्या दिल्ली में जाम कम होगा?

सरकार को उम्मीद है कि ई-रिक्शों की संख्या नियंत्रित करने, अनधिकृत वाहनों पर कार्रवाई करने और सुरक्षा नियम लागू करने से सड़कों पर दबाव घटेगा। लेकिन केवल वाहनों की संख्या सीमित करने से हर इलाके में जाम कम होगा, यह निश्चित नहीं है। मेट्रो स्टेशन और बाजारों के आसपास निर्धारित पार्किंग, व्यवस्थित स्टैंड, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन से बेहतर कनेक्टिविटी भी अहम भूमिका निभाएंगे।

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