जंतर-मंतर केस की जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर, सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026 | दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में पुलिस ने जांच की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़ा है। दोनों पर आरोप है कि वे अन्य कार्यकर्ताओं के साथ निर्धारित रास्ते और बैरिकेड पार करके जंतर-मंतर पहुंचे थे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2026 को हुए घटनाक्रम को लेकर दो अलग-अलग FIR दर्ज की गई थीं। इनमें से एक मामले की जांच पहले क्राइम ब्रांच को सौंपी गई और बाद में दूसरे मामले को भी क्राइम ब्रांच के हवाले कर दिया गया। अब जांच एजेंसी घटनाक्रम, आरोपों और संबंधित साक्ष्यों की पड़ताल करेगी।

सूत्रों के मुताबिक, 13 अक्टूबर को आशुतोष और सौरव के कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर जाने पर दो FIR दर्ज हुई थीं। कनॉट प्लेस केस मंगलवार को क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था। अब जंतर-मंतर केस भी क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है।

सौरव और आशुतोष को 12 अक्टूबर को बिना अनुमति जंतर-मंतर जाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों की 5 दिन की न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर को खत्म हुई थी, जिसे बढ़ाकर 21 अक्टूबर यानी आज तक कर दिया गया था। आज दोनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

मजिस्ट्रेट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में दी चुनौती

सौरव और आशुतोष ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि जमानतदार पेश करने के बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

दोनों ने 19 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मजिस्ट्रेट ने उनके नए जमानतदारों को स्वीकार नहीं किया था। मजिस्ट्रेट ने उनसे यह भी पूछा था कि उनसे शांति भंग होने की आशंका क्यों नहीं है। इस मामले में आज सुनवाई होनी है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए जंतर-मंतर में प्रवेश किया। इसी घटनाक्रम के बाद सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।

पुलिस ने मामले में अलग-अलग FIR दर्ज कीं। इन मामलों में कथित अनधिकृत प्रवेश और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम की जांच की जा रही है। हालांकि, पुलिस के आरोपों और संबंधित पक्षों के दावों का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ी

इस मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत भी चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक, 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। इसके बाद उनके पक्ष ने हिरासत से राहत पाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

CJP की ओर से हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की गई। वहीं, पुलिस की कार्रवाई और हिरासत की कानूनी प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए हैं। उनकी रिहाई और आगे की कार्रवाई का फैसला अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

प्रदर्शन के अधिकार और कानूनी प्रक्रिया पर बहस

जंतर-मंतर मामले ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक स्थलों के इस्तेमाल और पुलिस की अनुमति से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। नागरिकों को अपनी मांगें उठाने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान लागू कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन भी जरूरी है।

इस मामले में पुलिस के आरोपों और CJP से जुड़े पक्षों की दलीलों पर विचार न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा। फिलहाल, दोनों FIR की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.