पटना, 20 अक्टूबर 2026 | बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर जारी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को लेकर नेताओं की नाराजगी चर्चा में है। मोकामा विधायक अनंत सिंह के बाद अब अरविंद सिंह उर्फ छोटू सिंह ने भी संजय झा पर निशाना साधा है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के संगठन, टिकट वितरण और नेतृत्व के प्रभाव तक पहुंच गया है।
2024: नई कमेटी में हुआ बीजारोपण
वर्ष 2024 में जदयू की नई कमेटी गठित की गई, तभी पार्टी का अंदरूनी संघर्ष सामने उभर कर आया। पिछली बार उपाध्यक्ष रहे लक्ष्मेश्वर राय, जय कुमार सिंह, डॉ. रंजू गीता, अशोक कुमार, मो. खुर्शीद समेत कई वरिष्ठ नेताओं को नई कमेटी में स्थान नहीं मिला है। उसी तरह पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद, लखन ठाकुर और टुनटुन प्रसाद को भी उपाध्यक्ष नहीं बनाया गया है।
छोटू सिंह ने संजय झा पर साधा निशाना
JDU नेता अरविंद सिंह उर्फ छोटू सिंह ने संजय झा की राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि पटना से बाहर उन्हें कौन पहचानता है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार का समर्थन हटने पर संजय झा की वास्तविक राजनीतिक स्थिति सामने आ जाएगी।
छोटू सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं की वजह से पार्टी की साख प्रभावित हुई है। उन्होंने अनंत सिंह के समर्थन में भी बयान दिया और कहा कि अनंत सिंह न तो डरे हैं, न झुके हैं और न ही खरीदे जा सकते हैं। छोटू सिंह के इन बयानों ने पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को फिर चर्चा में ला दिया है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं; संजय झा की भूमिका और नेतृत्व को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए पार्टी के सभी पक्षों को देखना जरूरी है।
अनंत सिंह की नाराजगी की वजह क्या है?
मोकामा के विधायक अनंत सिंह की नाराजगी की मुख्य वजह पटना स्नातक सीट से JDU के उम्मीदवार नीरज कुमार को बनाया जाना है। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पहले से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। अनंत सिंह का आरोप है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीरज कुमार ने उनके खिलाफ प्रचार किया था, लेकिन पार्टी ने इसके बावजूद उन्हें विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बना दिया।
अनंत सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने नीतीश कुमार का लंबे समय तक साथ दिया और पार्टी के लिए काफी त्याग किया है। इसी विवाद के बीच वह JDU प्रत्याशी नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार करने से इनकार कर चुके हैं और जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में उतरने की खबरें भी सामने आई हैं।
इस विवाद में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। ललन सिंह ने अनंत सिंह की शिकायतों का जिक्र करते हुए कहा था कि विधानसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ प्रचार और बयानबाजी हुई थी। उन्होंने पार्टी के भीतर इस मामले को सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया।
इसके बाद JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बताया था कि विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को दी गई है, क्योंकि मामला उनके क्षेत्र से जुड़ा है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय और प्रभाव को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि, नेतृत्व के बीच किसी व्यापक सत्ता संघर्ष की पुष्टि करने वाले ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
संगठन में असंतोष की जड़ें 2024 से जुड़ी बताई जा रहीं
JDU के भीतर मौजूदा नाराजगी को केवल MLC चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा। रिपोर्टों के अनुसार, 2024 में पार्टी की नई कमेटी बनने के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं को संगठन में जगह नहीं मिली थी। इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण और नेताओं के समर्थकों को अवसर मिलने या नहीं मिलने को लेकर भी असंतोष की चर्चाएं सामने आईं।
2026 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी और बिहार प्रदेश कमेटी के गठन के बाद भी कुछ नेताओं और उनके समर्थकों को संगठन में जगह नहीं मिलने की बात सामने आई। राजनीतिक विश्लेषणों में इसे पार्टी के भीतर अलग-अलग प्रभावशाली समूहों के बीच खींचतान से जोड़कर देखा गया है। हालांकि, संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर असंतोष होना अपने आप में किसी सुनियोजित गुटबंदी का निर्णायक प्रमाण नहीं है।
छोटू सिंह पर पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
अरविंद सिंह उर्फ छोटू सिंह पहले भी JDU संगठन को लेकर विवादों में रहे हैं। जुलाई 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, नई प्रदेश कमेटी में जगह नहीं मिलने के बाद उनकी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से बहस हुई थी। इसके बाद अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने की खबर सामने आई थी।
उनके समर्थकों ने पटना स्थित JDU कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर उनकी वापसी की मांग भी की थी। ऐसे में संजय झा पर छोटू सिंह के ताजा हमले को पुराने संगठनात्मक विवाद के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
MLC चुनाव बना JDU के अंदरूनी विवाद का केंद्र
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव अब पार्टी के लिए केवल एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है। इसने उम्मीदवार चयन, पुराने राजनीतिक मतभेदों, संगठन में प्रतिनिधित्व और वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है।
एक तरफ पार्टी नेतृत्व नीरज कुमार की उम्मीदवारी के साथ खड़ा है, वहीं अनंत सिंह जैसे विधायक का विरोध और छोटू सिंह के बयान संगठन के भीतर असंतोष की ओर इशारा करते हैं। अब देखना होगा कि JDU नेतृत्व इस विवाद को बातचीत से सुलझा पाता है या चुनाव के दौरान यह खींचतान और बढ़ती है।