नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026 | अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिरम ने आरोप लगाया है कि चीन के सैनिक राज्य के अपर सुबनसिरी जिले में भारतीय क्षेत्र के अंदर 40 से 50 किलोमीटर तक घुस आए। उन्होंने जुलाई में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कथित झड़पों का भी दावा किया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिरम ने दावा किया है कि अपर सुबनसिरी जिले में चीन के सैनिक भारतीय सीमा के 40-50 किलोमीटर अंदर तक घुस आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी सैनिकों की गतिविधियों से स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
दूसरी ओर, भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को फर्जी बताया है। सेना के मुताबिक, वीडियो में अरुणाचल प्रदेश में चीनी कब्जे और भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान नहीं मिलने से जुड़े बयान गलत तरीके से जोड़े गए हैं। सेना ने कहा कि वीडियो अक्टूबर 2023 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से छेड़छाड़ करके बनाया गया है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने सीमावर्ती गांवों का किया दौरा
बोसिराम सिरम के मुताबिक, कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने 26 से 29 अगस्त के बीच अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। प्रतिनिधिमंडल ईटानगर से नाचो होते हुए लाइमकिंग और ताकसिंग पहुंचा, जहां स्थानीय निवासियों से बातचीत की गई।
कांग्रेस नेता का कहना है कि स्थानीय लोगों ने सीमा के आसपास गतिविधियों और आवागमन से जुड़ी परेशानियों की जानकारी दी। इन शिकायतों के आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार से जमीनी हालात की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल के आरोपों को अभी स्वतंत्र पुष्टि या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ठोस साक्ष्यों का समर्थन नहीं मिला है।
जुलाई में सैनिकों के बीच झड़प का भी आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई स्थानों पर आमना-सामना हुआ था। उनके मुताबिक, स्थानीय लोगों ने सैनिकों के बीच हाथापाई और लाठियों के इस्तेमाल की जानकारी दी।
सिरम ने यह भी आरोप लगाया कि सीमा पर तनाव का असर सैन्य गश्त और स्थानीय लोगों की आवाजाही पर पड़ा है। उन्होंने केंद्र से इन घटनाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाने की अपील की।
महत्वपूर्ण बात यह है कि जुलाई में कथित झड़पों और 40-50 किलोमीटर अंदर तक चीनी सैनिकों के पहुंचने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय कांग्रेस नेता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बोसिराम सिरम ने कहा कि सीमा के नजदीक रहने वाले कुछ समुदायों को उन इलाकों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है, जहां वे पारंपरिक रूप से याक चराने, शिकार करने और जंगल से जरूरी संसाधन जुटाने जाते थे।
कांग्रेस नेता ने इन शिकायतों को गंभीर बताते हुए कहा कि सीमावर्ती नागरिकों की आजीविका और आवाजाही से जुड़े मुद्दों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से स्थानीय निवासियों की बात सुनने और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने की मांग की।
सीमा पर सड़क और संचार व्यवस्था मजबूत करने की मांग
कांग्रेस ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सिरम के अनुसार, दुर्गम इलाकों में मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और जरूरी सामान की आपूर्ति में कठिनाइयां सुरक्षा बलों तथा स्थानीय नागरिकों के लिए चुनौती बन सकती हैं।
उन्होंने सीमावर्ती गांवों तक हर मौसम में चलने वाली सड़कों, बेहतर संचार व्यवस्था और सैनिकों के लिए आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के युवाओं को प्राथमिकता देने वाली अलग ‘अरुणाचल रेजिमेंट’ बनाने का सुझाव भी दिया। यह कांग्रेस नेता का प्रस्ताव है, किसी घोषित सरकारी फैसले की जानकारी नहीं।
केंद्र सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि सीमा से जुड़ी शिकायतों को केवल अफवाह बताकर खारिज करने के बजाय उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती इलाकों के निवासियों की चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इस बीच, भारत-चीन सीमा पर कथित गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। कांग्रेस ने केंद्र से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है, जबकि ऐसे संवेदनशील सुरक्षा मामलों में आरोपों और आधिकारिक रूप से सत्यापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
फिलहाल, अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के 40-50 किलोमीटर अंदर तक घुसने का दावा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने किया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सीमा पर वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए संबंधित सुरक्षा एजेंसियों और सरकार की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
भारत-चीन सीमा पर किसी भी संभावित गतिविधि का मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए इसकी पुष्टि विश्वसनीय साक्ष्यों और आधिकारिक बयानों के आधार पर ही की जानी चाहिए।