साहिल के परिवार में मुस्कान को अपनाने की चर्चा तेज, हाईकोर्ट में एक ही वकील करेगा पैरवी

मेरठ, 28 अक्टूबर 2026 |  मेरठ के बहुचर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए मुस्कान और साहिल की हाईकोर्ट में पैरवी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में मृत्युदंड के खिलाफ अपील दाखिल की है. खास बात यह है कि दोनों की अपील एक ही वकील के माध्यम से की गई है. बताया जा रहा है कि इस वकील को साहिल के परिजनों की ओर से पैरवी के लिए नियुक्त किया गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या साहिल के परिवार ने मुस्कान को भी स्वीकार कर लिया है? हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा मुस्कान-साहिल

मेरठ की जिला अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने मामले को विरल से विरलतम श्रेणी का माना था।

अब दोनों ने अपने वकीलों के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दोषसिद्धि और फांसी की सजा को चुनौती दी है। उनकी मांग है कि निचली अदालत के फैसले को रद्द किया जाए। हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत से मामले का रिकॉर्ड भी तलब किया है। अगली सुनवाई में मामले की कानूनी दलीलों पर आगे की कार्रवाई होगी।

सौरभ की हत्या के मामले में अदालत ने उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी. ट्रायल के दौरान दोनों की पैरवी अलग-अलग वकीलों ने की थी. मुस्कान के परिवार ने उससे दूरी बना ली थी. इसके चलते मुस्कान की मांग पर उसे सरकारी वकील रेखा जैन उपलब्ध कराई गई थीं, जबकि साहिल के मामले में उसके परिवार की ओर से अलग वकील पैरवी कर रहा था।

अब मृत्युदंड के खिलाफ अपील के दौरान दोनों के लिए एक ही वकील सामने आने से चर्चाओं का बाजार गर्म है. जानकारी के मुताबिक, मुस्कान ने जेल प्रशासन से वकील उपलब्ध कराने की मांग की थी. इसी बीच साहिल के परिजनों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए वकील नियुक्त किया गया. इसी वकील ने मुस्कान की ओर से भी मृत्युदंड के खिलाफ अपील की है. हालांकि, केवल एक वकील के जरिए पैरवी होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि साहिल के परिवार ने मुस्कान को अपना लिया है।

इस मामले में मुस्कान की बेटी के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. चर्चा है कि क्या साहिल का परिवार मुस्कान की बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी उठाने के लिए आगे आएगा. मेरठ जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल के नियमों के अनुसार, बच्ची को किसे सौंपना है, इस संबंध में मुस्कान की इच्छा महत्वपूर्ण होगी. यदि साहिल के परिजन बच्ची को अपने साथ रखना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए प्रार्थना पत्र देना होगा. इसके बाद प्रार्थना पत्र मुस्कान के सामने रखा जाएगा और उसकी इच्छा के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

क्या हाईकोर्ट में बदल सकती है फांसी की सजा?

मुस्कान और साहिल की अपील में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। बचाव पक्ष ने कथित तौर पर जांच प्रक्रिया, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को लेकर सवाल उठाए हैं। अपील में यह दलील भी दी गई है कि अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे साबित नहीं कर पाया।

अब हाईकोर्ट अपील में उठाए गए कानूनी सवालों, निचली अदालत के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगा। फांसी की सजा पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। फिलहाल निचली अदालत का फैसला चुनौती के अधीन है और हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है।

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