लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026 | उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सपा ‘पीडीए’ के नाम पर पिछड़ों की आंखों में धूल झोंक रही है। वहीं, भाजपा मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि एनडीए की ताकत से अखिलेश यादव घबरा गए हैं। सपा और कांग्रेस का गठबंधन अब ‘लठबंधन’ में बदल चुका है।
अनिल राजभर ने कहा कि सपा और अखिलेश यादव का इतिहास पिछड़ों और दलितों के अपमान से भरा है। अखिलेश को यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की कोई गैर यादव ओबीसी उनकी बराबरी करे। उन्होंने कहा कि सपा शासनकाल में कल्याण सिंह और सोनेलाल पटेल जैसे बड़े नेताओं को बार-बार अपमानित किया गया।
अनिल राजभर ने कहा कि सपा सरकार में केवल एक मजहब का बोलबाला था। लेकिन योगी सरकार में हर जाति, वर्ग और मजहब को सम्मान मिलता है। श्रृंगवेरपुर धाम में भगवान राम और भगवान निषादराज की गले मिलती हुई मूर्ति इसका प्रतीक है।
‘गैर-यादव OBC को बराबरी करते देखना पसंद नहीं’
अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव नहीं चाहते कि कोई गैर-यादव पिछड़ा वर्ग का नेता उनके बराबर राजनीतिक हैसियत हासिल करे। उनके मुताबिक, समाजवादी पार्टी पिछड़े वर्गों के हितों की बात तो करती है, लेकिन गैर-यादव OBC समुदायों को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मामले में उसका रवैया सवालों के घेरे में है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सपा के शासनकाल में कल्याण सिंह और सोनेलाल पटेल जैसे नेताओं का बार-बार अपमान किया गया। ये आरोप अनिल राजभर की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर अलग से प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले का दूसरा पक्ष भी स्पष्ट होगा।
कल्याण सिंह और सोनेलाल पटेल का क्यों किया जिक्र?
अनिल राजभर ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो प्रमुख पिछड़े वर्गों के नेताओं का उल्लेख किया। कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे, जबकि सोनेलाल पटेल ने अपना दल की स्थापना की थी। दोनों नेताओं का प्रदेश की पिछड़ा वर्ग राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में इन नेताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया। उनके इस बयान का मकसद PDA की अवधारणा और पिछड़े वर्गों के हितों को लेकर अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाना है। हालांकि, उनके आरोपों और संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं का आकलन उपलब्ध रिकॉर्ड और विभिन्न पक्षों के बयानों के आधार पर किया जाना चाहिए।
2027 चुनाव से पहले PDA बनाम NDA की सियासत
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए PDA और NDA के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार बढ़ रही है। समाजवादी पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के समर्थन को अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है। वहीं, बीजेपी और उसके सहयोगी दल गैर-यादव OBC समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा और सपा-कांग्रेस के गठबंधन को लेकर टिप्पणी की। इस तरह PDA को लेकर चल रही बहस अब केवल सामाजिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न समुदायों के समर्थन और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर भी केंद्रित हो गई है।
‘राज्यसभा चुनाव में दिख गई अखिलेश के पीडीए की हकीकत’
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव के पीडीए की हकीकत को प्रदेश की जनता ने राज्यसभा चुनाव में देख लिया है। उन्होंने कहा कि 2027 का चुनाव अखिलेश के लिए संविधान बचाने का नहीं, बल्कि अपना परिवार बचाने का है।
भाजपा प्रवक्ता ने सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चल रही तनातनी को लेकर कहा कि इनका गठबंधन अब लठबंधन में बदल चुका है। दोनों पार्टियों की सिर-फुटौव्वल अब खुलकर सामने आ रही है।