हरियाणा में मधुमक्खी पालकों को मिलेगा 6.25 लाख रुपये तक का बीमा कवर, जानें प्रीमियम और पात्रता

चंडीगढ़, 28 अक्टूबर 2026 | हरियाणा सरकार ने मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों और उद्यमियों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने मधुमक्खी पालन को मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में शामिल कर लिया है। अब निर्धारित परिस्थितियों में मधुमक्खियों की कॉलोनियों और बक्सों को नुकसान होने पर पात्र मधुमक्खी पालक बीमा सहायता प्राप्त कर सकेंगे। सरकार की इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं के कारण होने वाले नुकसान से मधुमक्खी पालकों को राहत देना है।

प्रदेश सरकार ने मधुमक्खी पालन को मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के दायरे में शामिल कर लिया है। इससे मधुमक्खी पालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और इस व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि योजना के तहत बाढ़ में मधुमक्खी के बक्से और कालोनियां डूबने, आग लगने तथा परिवहन के दौरान दुर्घटना से होने वाले नुकसान को कवर किया जाएगा। परिवहन संबंधी दुर्घटना हरियाणा के भीतर हुई होनी चाहिए और उसकी एफआइआर या डीडीआर दर्ज होना अनिवार्य है। मधुमक्खियों में महामारी के कारण होने वाले नुकसान पर भी मुआवजे का प्रविधान किया गया है।

योजना के तहत प्रति मधुमक्खी पालक अधिकतम 250 मधुमक्खी कॉलोनियों और 250 बक्सों को बीमा सुरक्षा देने का प्रविधान है। इसके लिए प्रति कालोनी 50 रुपये और प्रति बाक्स 50 रुपये बीमा शुल्क निर्धारित किया गया है। निर्धारित प्रविधानों के अनुसार, प्रति कालोनी और प्रति बाक्स 1,250 रुपये की बीमा राशि का प्रविधान रहेगा। अधिकतम 250 इकाइयों के आधार पर कॉलोनियों और बक्सों के लिए अलग-अलग बीमा राशि 3 लाख 12 हजार 500 रुपये तक हो सकती है।

किन परिस्थितियों में मिलेगा मुआवजा?

मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत मधुमक्खी पालन में होने वाले कुछ निर्धारित नुकसान को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से ये परिस्थितियां हैं:

  • बाढ़: पानी में डूबने से मधुमक्खी की कॉलोनियों और बक्सों को नुकसान।
  • आग लगना: आग के कारण कॉलोनियों या बक्सों का खराब होना अथवा नष्ट होना।
  • परिवहन के दौरान दुर्घटना: मधुमक्खी कॉलोनियों और बक्सों को ले जाते समय दुर्घटना से नुकसान। इसके लिए दुर्घटना हरियाणा के भीतर होनी चाहिए और एफआईआर या डीडीआर दर्ज होना जरूरी है।
  • मधुमक्खियों में महामारी: महामारी के कारण होने वाले नुकसान पर भी निर्धारित प्रावधानों के तहत मुआवजे की व्यवस्था है।

हालांकि, बीमा का लाभ योजना की शर्तों और नुकसान के सत्यापन के अनुसार मिलेगा।

बीमा योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी शर्तें

हरियाणा सरकार ने योजना का लाभ लेने के लिए कुछ पात्रता शर्तें तय की हैं। इनके बारे में जानकारी होना मधुमक्खी पालकों के लिए जरूरी है।

  1. अधिकतम सीमा: एक मधुमक्खी पालक अधिकतम 250 मधुमक्खी कॉलोनियों और 250 बक्सों के लिए निर्धारित बीमा सुरक्षा ले सकता है।
  2. पंजीकरण अनिवार्य: मधुमक्खी पालक का भावांतर भरपाई योजना-शहद के तहत पंजीकरण होना चाहिए।
  3. यूनिक नंबर जरूरी: प्रत्येक मधुमक्खी बॉक्स पर भावांतर भरपाई योजना का संबंधित यूनिट नंबर होना अनिवार्य है।
  4. नियमों के अनुसार दावा: नुकसान होने पर संबंधित दस्तावेज और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बीमा सहायता के लिए दावा करना होगा।

योजना की जानकारी कहां से मिलेगी?

मधुमक्खी पालक योजना की पात्रता, पंजीकरण और बीमा दावे की प्रक्रिया के बारे में जानकारी अपने जिले के जिला उद्यान अधिकारी के कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा हरियाणा उद्यान विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-2021 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

मधुमक्खी पालन को मिलेगा बढ़ावा

हरियाणा में मधुमक्खी पालन शहद उत्पादन के साथ-साथ फसलों के परागण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्राकृतिक आपदाओं, आग, दुर्घटनाओं या महामारी के कारण कॉलोनियों और बक्सों को नुकसान होने पर किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बीमा सुरक्षा मिलने से जोखिम कम करने और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

हरियाणा सरकार की मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में मधुमक्खी पालन को शामिल करने से पात्र पालकों को प्रति कॉलोनी और प्रति बॉक्स 1,250 रुपये का बीमा कवर मिलेगा। अधिकतम 250 कॉलोनियों और 250 बक्सों के लिए संयुक्त बीमा कवर 6.25 लाख रुपये तक हो सकता है। योजना का लाभ लेने के लिए भावांतर भरपाई योजना-शहद में पंजीकरण और प्रत्येक बॉक्स का यूनिट नंबर जरूरी है।

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