बिल पास कराने के नाम पर रिश्वतखोरी: JE और ड्राइवर को एंटी करप्शन टीम ने दौड़ाकर पकड़ा, रंगे हाथ गिरफ्तार

मेरठ , 27 मई 2026 । मेरठ के सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक और बड़ा मामला सामने आया है। बिल पास कराने के नाम पर रिश्वत मांगने वाले जूनियर इंजीनियर (JE) को एंटी करप्शन टीम ने उसके ड्राइवर सहित रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन टीम ने पीछा कर दोनों को दबोच लिया। इस घटना के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी 25 लाख रुपये का भुगतान जारी करने के बदले रिश्वत मांग रहे थे। उत्तर प्रदेश पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक संगठन (एसीओ) के मेरठ प्रकोष्ठ के प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र कुमार ने बताया कि बागपत निवासी ठेकेदार सत्येंद्र सिंह तोमर ने शिकायत दर्ज कराई थी। कुमार ने बताया कि शिकायत के अनुसार, निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद उनका करीब 25 लाख रुपये का भुगतान लंबे समय से रोका गया था।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचना दी थी कि संबंधित JE बिल पास कराने के बदले रिश्वत की मांग कर रहा है। आरोप है कि अधिकारी ने फाइल आगे बढ़ाने और भुगतान जारी करने के एवज में मोटी रकम मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद टीम ने पूरे मामले की गोपनीय जांच की और फिर ट्रैप लगाकर कार्रवाई को अंजाम दिया।

बताया जा रहा है कि तय योजना के तहत शिकायतकर्ता आरोपी को रिश्वत की रकम देने पहुंचा। जैसे ही JE और उसका ड्राइवर पैसे लेते हुए पकड़े गए, दोनों वहां से भागने की कोशिश करने लगे। हालांकि एंटी करप्शन टीम पहले से सतर्क थी और पीछा कर उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया गया।

कार्रवाई के दौरान टीम ने रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के हाथों और नोटों की जांच में रिश्वत लेने की पुष्टि हुई है। इसके बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।

एंटी करप्शन अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। आम जनता से भी अपील की गई है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी काम के बदले रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत तुरंत संबंधित एजेंसियों से करें।

घटना के बाद संबंधित विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। विभागीय अधिकारियों ने मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है और आरोपी JE के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि मामले में और लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी लंबे समय से बड़ी समस्या बनी हुई है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होने से भ्रष्ट अधिकारियों में डर पैदा होगा और आम लोगों को राहत मिल सकेगी।

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