नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026 | त्योहारों के मौसम में ऑनलाइन शॉपिंग पर मिलने वाली भारी छूट और आकर्षक ऑफर ग्राहकों को खूब लुभाते हैं। लेकिन हर डिस्काउंट ऑफर असली नहीं होता। साइबर ठग नामी कंपनियों के लोगो, प्रोडक्ट की तस्वीरों और मिलती-जुलती वेबसाइटों का इस्तेमाल करके लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट के डीसीपी ने भी फेक डिस्काउंट और ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से सतर्क रहने की सलाह दी है।
भारी छूट का लालच देकर बिछाया जाता है ठगी का जाल
साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेज और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए ऐसे ऑफर दिखाते हैं, जो सामान्य कीमत से काफी कम होते हैं। कई बार महंगे मोबाइल, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और त्योहारों के सामान पर 70 से 90 प्रतिशत तक छूट का दावा किया जाता है।
इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद ग्राहक ऐसी वेबसाइट पर पहुंच सकते हैं, जो देखने में किसी लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसी लगती है। ग्राहक भुगतान कर देते हैं, लेकिन सामान नहीं पहुंचता। कुछ मामलों में नकली वेबसाइट के जरिए कार्ड की जानकारी और दूसरी निजी जानकारियां चुराने की कोशिश भी की जाती है।
ऐसे पहचानें फेक डिस्काउंट ऑफर
ऑनलाइन खरीदारी करते समय कुछ संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
- बहुत कम कीमत: किसी महंगे प्रोडक्ट पर असामान्य रूप से बड़ी छूट मिल रही हो, तो पहले ऑफर की पुष्टि करें।
- वेबसाइट का गलत पता: असली ब्रांड से मिलता-जुलता URL नकली हो सकता है। वेबसाइट का नाम और पता ध्यान से जांचें।
- जल्दबाजी का दबाव: “सिर्फ पांच मिनट बाकी” या “अभी खरीदें, वरना मौका खत्म” जैसे संदेशों के दबाव में भुगतान न करें।
- संदिग्ध भुगतान: यदि वेबसाइट केवल किसी अनजान व्यक्ति के UPI अकाउंट में पैसे भेजने को कहे, तो सावधानी बरतें।
- नकली विज्ञापन: सोशल मीडिया पर किसी ब्रांड का लोगो दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि विज्ञापन असली है।
खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान
साइबर ठगी से बचने के लिए हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ऑफर की पुष्टि करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने के बजाय ब्राउजर में वेबसाइट का पता खुद टाइप करें। खरीदारी से पहले विक्रेता की जानकारी, रिटर्न पॉलिसी और ग्राहक सहायता के विवरण भी जांचें।
इसके अलावा, किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में APK फाइल या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें। बैंकिंग पासवर्ड, कार्ड का CVV, OTP और UPI PIN किसी के साथ साझा न करें। पैसे प्राप्त करने के लिए सामान्य तौर पर UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती।
खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान
साइबर ठगी से बचने के लिए हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ऑफर की पुष्टि करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने के बजाय ब्राउजर में वेबसाइट का पता खुद टाइप करें। खरीदारी से पहले विक्रेता की जानकारी, रिटर्न पॉलिसी और ग्राहक सहायता के विवरण भी जांचें।
इसके अलावा, किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में APK फाइल या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें। बैंकिंग पासवर्ड, कार्ड का CVV, OTP और UPI PIN किसी के साथ साझा न करें। पैसे प्राप्त करने के लिए सामान्य तौर पर UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती।
फर्जी कस्टमर केयर और रिफंड के नाम पर भी ठगी
कई बार ठग ऑनलाइन ऑर्डर में समस्या या रिफंड का बहाना बनाकर ग्राहकों से संपर्क करते हैं। वे खुद को कस्टमर केयर कर्मचारी बताकर OTP, बैंकिंग जानकारी या UPI PIN मांग सकते हैं। कुछ मामलों में लोगों को स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने के लिए भी कहा जाता है।
ऐसी स्थिति में केवल कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर उपलब्ध ग्राहक सहायता नंबर का इस्तेमाल करें। किसी अनजान व्यक्ति के निर्देश पर भुगतान मंजूर न करें और न ही अपने फोन का नियंत्रण किसी दूसरे व्यक्ति को दें।
ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
यदि आपके बैंक खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसे निकल गए हैं, तो बिना देर किए 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। साथ ही अपने बैंक को सूचना देकर संबंधित खाते या कार्ड को सुरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
भुगतान की रसीद, ट्रांजैक्शन आईडी, संदिग्ध वेबसाइट का लिंक, मैसेज और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। जल्दी शिकायत करने से रकम रोकने या वापस मिलने की संभावना बेहतर हो सकती है, हालांकि इसकी गारंटी नहीं होती।
फेस्टिव सीजन में अच्छी डील तलाशना स्वाभाविक है, लेकिन केवल भारी छूट देखकर भुगतान करना नुकसानदेह हो सकता है। ऑफर की पुष्टि करें, भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से खरीदारी करें और अपनी बैंकिंग जानकारी गोपनीय रखें। याद रखें, आकर्षक विज्ञापन और नामी ब्रांड का लोगो किसी वेबसाइट के असली होने का प्रमाण नहीं हैं।