नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026 | दिवाली से पहले दिल्ली-NCR में पटाखों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रैप-1 लागू होने के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा या ग्रीन क्रैकर्स के इस्तेमाल की अनुमति मिल सकती है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के रुख और आधिकारिक आदेशों पर लोगों की नजर बनी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कहा था कि पटाखों के इस्तेमाल को लेकर ऐसा रास्ता निकालना होगा, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखने के साथ प्रदूषण से होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सके। लोगों का कहना है कि जब देश के दूसरे हिस्सों में पटाखे जलाए जा रहे हैं, तो दिल्ली-एनसीआर में ही पूरी तरह रोक क्यों है? ऑल द्वारका रेजिडेंट फेडरेशन के अजीत स्वामी के मुताबिक, आतिशबाजी के लिए समय तय हो। सिर्फ ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति मिले।
दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु गुणवत्ता अक्सर चिंता का विषय बन जाती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां, धूल और मौसमी परिस्थितियां प्रदूषण को प्रभावित करती हैं। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं भी वायु गुणवत्ता पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
इसी वजह से पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध तथा पर्यावरण संबंधी नियम महत्वपूर्ण हो जाते हैं। हालांकि, ग्रैप-1 लागू होने का मतलब अपने आप यह नहीं है कि पटाखों पर अलग से पूर्ण प्रतिबंध का आदेश जारी हो गया है।
क्या ग्रीन क्रैकर्स को मिल सकती है छूट?
ग्रीन क्रैकर्स को पारंपरिक पटाखों के मुकाबले प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। लेकिन इन्हें ग्रीन क्रैकर्स कहे जाने भर से इनके इस्तेमाल की स्वतः अनुमति नहीं मिल जाती। इनके उपयोग पर लागू नियम संबंधित सरकारी आदेशों और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करते हैं।
इसलिए दिल्ली-NCR में दिवाली के दौरान ग्रीन क्रैकर्स की अनुमति है या नहीं, इसकी पुष्टि नवीनतम आधिकारिक आदेश से करना जरूरी है।
दिवाली से पहले इन बातों पर रखें नजर
- पटाखों के इस्तेमाल पर लागू नवीनतम सरकारी आदेश।
- ग्रीन क्रैकर्स की बिक्री और उपयोग से जुड़ी शर्तें।
- सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश।
- दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित उपाय।