नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026: दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के अध्यक्ष रोहन जेटली आज दिल्ली क्रिकेट का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके हैं। अरुण जेटली के बेटे के रूप में मिली विरासत को उन्होंने सिर्फ संभाला ही नहीं, बल्कि उसे नई दिशा दी है – खासकर महिला क्रिकेट में।
महिला क्रिकेट को दी नई उड़ान
रोहन जेटली के नेतृत्व में DDCA ने पिछले 2 साल में महिला क्रिकेट पर सबसे ज्यादा फोकस किया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है वीमेंस दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL)।
जब DPL शुरू हुई थी तो सिर्फ 80 खिलाड़ियों ने रजिस्ट्रेशन किया था। आज उनके कार्यकाल में यह संख्या 700 से ज्यादा हो गई है और 48 क्लब टीमें महिला लीग में खेल रही हैं।
हाल ही में उन्होंने कहा था – “दिल्ली में महिला क्रिकेट लगातार मजबूत हो रहा है। हमारा मकसद सिर्फ टूर्नामेंट कराना नहीं, बल्कि एक ऐसा रास्ता बनाना है जहाँ DDCA वीमेंस लीग से खिलाड़ी सीधे DPL और फिर दिल्ली की सीनियर टीम तक पहुंचे।”
उनकी इस सोच का नतीजा मैदान पर दिखा भी। दिल्ली की सीनियर महिला टीम ने 14 साल बाद 2025-26 में वन-डे ट्रॉफी जीती है।
प्रशासक से ज्यादा एक विजनरी लीडर
रोहन जेटली पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं, लेकिन DDCA अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने 3 चीजों पर काम किया है:
1. पारदर्शिता: DPL में ओपन ऑक्शन और ट्रायल सिस्टम लाए।
2. इंफ्रास्ट्रक्चर: अरुण जेटली स्टेडियम का कायाकल्प और छोटे ग्राउंड्स को बेहतर करना।
3. ग्रासरूट क्रिकेट: क्लब क्रिकेट को फिर से मजबूत करना, ताकि हर कॉलोनी के बच्चे को मौका मिले।
पिता की तरह ही ‘यारों के यार’
जिस तरह अरुण जेटली को सभी दलों में सम्मान मिलता था, वही छवि रोहन की भी है। BCCI में वह युवा प्रशासकों में सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं।
क्रिकेट के जानकार मानते हैं कि रोहन जेटली ने DDCA को विवादों से निकालकर परफॉर्मेंस वाले संगठन में बदल दिया है। DPL 2026 का सफल आयोजन और महिला क्रिकेट में निवेश इसका सबसे बड़ा सबूत है।