बिहार में तीन तलाक पर पहली सजा! पति को 2 साल की जेल

पटना , 17 अक्टूबर 2026 । बिहार में तीन तलाक के मामले में पहली बार सजा सुनाई गई है। पटना की एक अदालत ने पत्नी को तत्काल तीन तलाक देने के मामले में नौशाद अहमद को दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 6,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला इसलिए चर्चा में है, क्योंकि पति-पत्नी की शादी को करीब 21 साल हो चुके थे और उनके तीन बच्चे भी हैं। अदालत के फैसले के बाद तीन तलाक कानून के तहत बिहार में हुई पहली सजा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

तीन तलाक रोधी कानून के तहत पहली सजा

पटना अदालत ने आरोपी नौशाद अहमद को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 341 (गलत तरीके से रोकना) के तहत दोषी पाया है। बिहार में इस कानून के तहत किसी आरोपी को दोषी ठहराए जाने का ये पहला मामला है।

2001 में हुई थी शादी, 2022 में दिया तीन तलाक

मामला पटना जिले के बिहटा थाना क्षेत्र के सिमरी गांव का है। रिपोर्टों के मुताबिक, नौशाद अहमद की शादी रजिया सुल्तान उर्फ गुड़िया से 9 नवंबर 2001 को हुई थी। दंपती के तीन बच्चे हैं।

शिकायत के अनुसार, वर्ष 2022 में पति ने पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट की थी। पत्नी ने यह आरोप भी लगाया कि एक मौके पर उस पर तेजाब फेंकने की कोशिश की गई। इसके बाद 5 सितंबर 2022 को नौशाद ने कथित तौर पर पत्नी को तत्काल तीन तलाक दे दिया। पत्नी की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की।

इस मामले की सुनवाई पटना की जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-24 राजीव रंजन सहाय की अदालत में हुई। अदालत ने नौशाद अहमद को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया।

अदालत ने दो साल के सश्रम कारावास के साथ 6,500 रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में दोषी को एक महीने और 22 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जुर्माने की रकम वसूल होने पर शिकायतकर्ता पत्नी को दिए जाने का आदेश है।

पुलिस जांच और गवाहों की गवाही बनी अहम

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच की और 31 जुलाई 2023 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तीन गवाहों के बयान पेश किए। इन्हीं साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर अदालत ने तीन तलाक देने तथा अन्य संबंधित आरोपों में दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।

हालांकि, पत्नी पर कथित तेजाब हमले की कोशिश से जुड़े आरोप में अदालत ने नौशाद को बरी कर दिया। यानी अदालत ने इस आरोप को साबित मानते हुए सजा नहीं दी, जबकि तीन तलाक और अन्य संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया।

फैसले के बाद बचाव पक्ष ने कहा है कि अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद पटना हाई कोर्ट में इसे चुनौती देने की तैयारी की जाएगी। इसलिए यह मामला आगे अपील की न्यायिक प्रक्रिया में भी जा सकता है।

बिहार में इस कानून के तहत यह पहला दोषसिद्धि का मामला बताया जा रहा है। फैसले ने तत्काल तीन तलाक से जुड़े मामलों में शिकायत, पुलिस जांच, गवाहों और अदालत की सुनवाई की भूमिका को फिर चर्चा में ला दिया है।

क्या कहता है तीन तलाक कानून?

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत तत्काल तीन तलाक को अवैध और शून्य घोषित किया गया है। इस कानून की धारा 4 में ऐसा तलाक देने वाले पति के लिए अधिकतम तीन साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। कानून में पीड़ित महिला के भरण-पोषण और नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा से संबंधित प्रावधान भी हैं।

पटना की अदालत का यह फैसला बिहार में इस कानून के तहत पहली सजा के रूप में सामने आया है। अब आगे की कानूनी स्थिति बचाव पक्ष की अपील और उच्च न्यायालय की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

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