नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026 । दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए 47.56 लाख मतदाताओं के मामलों की दोबारा जांच शुरू हो गई है। चुनाव अधिकारियों ने यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया है, जिनमें कहा गया कि कई ऐसे लोगों के नाम भी सूची से गायब हैं, जो जीवित हैं और अपने पंजीकृत पते पर रह रहे हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को ऐसे मामलों का दोबारा सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
यह कदम उन शिकायतों के बीच उठाया गया है, जिनमें कहा गया था कि कई ऐसे वोटों के नाम भी ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जो जीवित हैं और अपने रजिस्टर्ड पते पर ही रह रहे हैं। अशोक कुमार ने बताया कि 70 विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ घर-घर जाकर नोटिस वाले मामलों का निपटारा कर रहे हैं। इसी दौरान ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए वोटों का भी दोबारा वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
47.56 लाख मतदाताओं के नाम क्यों हटे?
दिल्ली में SIR की गणना प्रक्रिया के बाद 31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। उस समय दिल्ली के करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.53 लाख के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल थे, जबकि 47,56,722 मतदाताओं के गणना फॉर्म एकत्र नहीं हो सके थे।
इन मामलों को ASDD श्रेणी में रखा गया था। इसमें ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे नाम वाली श्रेणियों में दर्ज किया गया। हालांकि, नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आने का मतलब अपने आप यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति अपात्र है। इसी वजह से अब इन मामलों की दोबारा जांच की जा रही है।
दिल्ली के विभिन्न इलाकों में बूथ लेवल ऑफिसर मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में करीब 15 हजार BLO लगाए जाएंगे। वे घर-घर जाकर उन मामलों का सत्यापन करेंगे, जिनमें मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर रह गए हैं।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि केवल नाम या व्यक्तिगत विवरण में मामूली गलती होने पर किसी मामले को बिना उचित जांच के खारिज न किया जाए। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि दोबारा सत्यापन से सही मतदाताओं की पहचान करने और मतदाता सूची की त्रुटियों को दूर करने में मदद मिलेगी।
33.12 लाख नोटिस मामलों में 25 लाख का समाधान
मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान 33.12 लाख लोगों को तार्किक विसंगतियों, रिकॉर्ड का मिलान नहीं होने या वर्ष 2002 की मतदाता सूची से विवरण नहीं जुड़ पाने जैसे कारणों से नोटिस जारी किए गए थे। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार के अनुसार, इनमें से करीब 25 लाख मामलों का समाधान किया जा चुका है।
ये 33.12 लाख नोटिस वाले मामले उन 47.56 लाख मतदाताओं के मामलों से अलग हैं, जिनके नाम गणना चरण के बाद ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हुए थे। अधिकारियों ने शेष नोटिस मामलों के निपटारे के लिए 30 अक्टूबर की समयसीमा बताई है।
वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या करें?
अगर किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, तो वह फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए आवेदन कर सकता है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, BLO भी ऐसे मामलों के सत्यापन और प्रक्रिया में सहायता कर सकते हैं।
मतदाता अपना नाम और अन्य विवरण दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध SIR ड्राफ्ट सूची में जांच सकते हैं। नाम नहीं मिलने पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी या BLO से संपर्क करके आगे की प्रक्रिया की जानकारी लेना उपयोगी होगा।
4 दिसंबर को प्रकाशित होगी अंतिम मतदाता सूची
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने की जानकारी दी गई है। उससे पहले अधिकारियों को हटाए गए नामों का दोबारा सत्यापन करने और नोटिस से जुड़े मामलों का निपटारा करने का काम पूरा करना है।
इस प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों की नजर बनी हुई है। जहां चुनाव अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल रखना है, वहीं नाम हटने की शिकायतों के कारण पारदर्शी जांच और समय पर समाधान की मांग भी उठ रही है। अंतिम सूची से पहले मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण होगा।