वेस्ट यूपी की शिक्षक-स्नातक MLC सीटों पर 18 उम्मीदवार आमने-सामने

मेरठ, 17 अक्टूबर 2026 । पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों पर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। मेरठ-सहारनपुर मंडल की इन दोनों सीटों के लिए कुल 18 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। हालांकि, मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच माना जा रहा है। इन चुनावों में नौ जिलों के 1,82,720 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान 23 अक्टूबर 2026 को होना है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है। ऐसे में दोनों दलों ने मतदाताओं तक पहुंचने और अपने उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश तेज कर दी है।

वैसे मेरठ-सहारनपुर मंडल की स्नातक और शिक्षक एमएलसी की हॉट सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी में सीधी जंग दिख रही है। लेकिन इसके बाद भी सियासी पंडितों की नजर में सवाल यह है कि भाजपा इन दोनों सीटों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए क्या रणनीति अपना रही है? इन सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। वहीं सपा की भाजपा से सीटें छीनने की चुनौती कितनी प्रभावी होगी? साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी क्या और किस तरह चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं? ऐसे में लोगों की नजर है कि जीत का सेहरा किसके सिर सजेगा। हालांकि, इन शिक्षक और स्नातक विधान परिषद की सीटों के वोटर सामान्य विधानसभा चुनाव के वोटरों से अलग होते हैं। इसलिए एमएलसी चुनाव के परिणाम को सीधे तौर पर 2027 विधानसभा चुनाव का संकेत नहीं माना जा सकता।

नौ जिलों के मतदाता तय करेंगे उम्मीदवारों का भविष्य

मेरठ-सहारनपुर मंडल की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर शामिल हैं। दोनों सीटों पर कुल 1,82,720 मतदाता पंजीकृत हैं।

इनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के 1,28,595 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के 54,125 मतदाता शामिल हैं। इस चुनाव की खास बात यह है कि यहां सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह सभी वयस्क मतदाता वोट नहीं डालते। स्नातक सीट पर पात्र पंजीकृत स्नातक मतदाता और शिक्षक सीट पर निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले पंजीकृत शिक्षक मतदान करते हैं। इसलिए उम्मीदवारों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं से सीधे संपर्क पर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।

मेरठ स्नातक सीट पर बीजेपी और सपा के बीच मुकाबला

मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आठ उम्मीदवार मैदान में हैं। बीजेपी ने दिनेश गोयल को उम्मीदवार बनाया है, जबकि सपा की ओर से प्रमेन्द्र सिंह चुनाव लड़ रहे हैं।

इन दोनों के अलावा अमित कुमार जैन, दुष्यंत, मोहम्मद अकरम रजा, राहुल कुशवाहा, विक्रांत त्यागी और विजय कुमार त्यागी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। ऐसे में मुकाबले में दो प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के साथ निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 10 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी ने मौजूदा एमएलसी श्रीचंद शर्मा पर भरोसा जताया है, जबकि सपा ने नितिन कुमार तोमर को मैदान में उतारा है।

इनके अलावा कुलदीप मलिक, तनुज गंभीर, पंकज कुमार, बाकिर हुसैन, स्वराज पाल, सुशील, डॉ. सुशील कुमार पुंडीर और हरकेश सिंह भी चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर शिक्षकों के मुद्दे, उम्मीदवारों का स्थानीय संपर्क और संगठनात्मक समर्थन चुनावी चर्चा के प्रमुख पहलू हैं।

बीजेपी और सपा ने तेज किया प्रचार

चुनाव से पहले बीजेपी और सपा दोनों अपने उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय हैं। बीजेपी की ओर से वरिष्ठ नेताओं को प्रचार अभियान में लगाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 अक्टूबर को गाजियाबाद में पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में सभा की। इस दौरान उन्होंने सपा की नीतियों और युवाओं के भविष्य को लेकर आलोचना की। ये टिप्पणियां उनके राजनीतिक संबोधन का हिस्सा थीं।

वहीं, सपा भी शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने में जुटी है। पार्टी का प्रयास है कि बीजेपी के उम्मीदवारों को चुनौती देकर इन सीटों पर अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत की जाए। हालांकि, चुनाव का नतीजा मतदाताओं की पसंद और मतदान के बाद मतगणना से ही स्पष्ट होगा।

इन निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याएं, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, रोजगार और युवाओं से जुड़े सवाल चुनावी चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं। स्नातक मतदाताओं के बीच रोजगार, अवसर और क्षेत्रीय विकास जैसे विषय भी अहम हो सकते हैं।

हालांकि, प्रत्येक मतदाता की प्राथमिकता अलग हो सकती है। इसलिए चुनावी नतीजों को केवल किसी एक मुद्दे या राजनीतिक दल की लोकप्रियता से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना

मेरठ-सहारनपुर मंडल की शिक्षक और स्नातक सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। दोनों सीटों पर बीजेपी का कब्जा है और सपा उन्हें चुनौती दे रही है।

इन चुनावों में उम्मीदवारों के व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय समीकरण और पंजीकृत मतदाताओं की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हालांकि, विधान परिषद के इन सीमित मतदाता समूहों वाले चुनावों के नतीजों को सीधे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का संकेत मानना सही नहीं होगा।

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