भारत ने UN में पाकिस्तान को घेरा, कहा- अल्पसंख्यकों पर हमें नसीहत देने से पहले अपना रिकॉर्ड देखे

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026 | भारत ने संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर पाकिस्तान पर सवाल उठाए हैं। भारत ने कहा कि जो देश अपने यहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित नहीं कर पा रहा, उसे भारत को इस मुद्दे पर नसीहत देने का अधिकार नहीं है। यह बयान 23 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकारों से जुड़े संवाद के दौरान दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र (UN) में गुरूवार को भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक आजादी और मानवाधिकारों को लेकर तीखी बहस हुई। भारत ने पाकिस्तान पर अपने धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा नहीं करने का आरोप लगाया।

भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या घट रही है और उनके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं कर सकता, उसे भारत को नसीहत देने का कोई हक नहीं है।

इसके पहले पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि जम्मू-कश्मीर में लोग फर्जी मुठभेड़ों में मारे जा रहे हैं। उन्हें सम्मान के साथ दफनाने का हक भी नहीं दिया जाता।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा उठाया

भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताई। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की आबादी में गिरावट और उनके अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं। भारत ने पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर के उन क्षेत्रों की स्थिति पर भी ध्यान देने को कहा, जो उसके कब्जे में हैं।

आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों पर भी जोर

भारत ने चर्चा के दौरान आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों को भी महत्वपूर्ण बताया। भारतीय पक्ष ने कहा कि आतंकवादियों के अधिकारों पर चर्चा करते समय उन निर्दोष लोगों के अधिकारों और नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, जो आतंकी हमलों में अपनी जान गंवाते हैं। भारत ने कारगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने युद्ध में मारे गए कई पाकिस्तानी सैनिकों को सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार दफनाया था।

भारत-पाकिस्तान के बीच फिर उठा मानवाधिकारों का मुद्दा

भारत और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर आतंकवाद, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर एक-दूसरे की आलोचना करते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत का ताजा बयान इसी कूटनीतिक टकराव का हिस्सा है। दोनों देशों के आरोपों और दावों के बीच धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा तथा मानवाधिकारों के पालन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय चर्चा में बना हुआ है।

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