दिल्ली में ट्रैफिक सुधार की नई पहल: दयानंद मार्ग की तीन रेडलाइट होंगी सिग्नल-फ्री, बिहारी कॉलोनी में ट्रायल शुरू
नई दिल्ली, 15 जून् 2026 । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए दयानंद मार्ग पर तीन प्रमुख रेडलाइट चौराहों को सिग्नल-फ्री बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। इस परियोजना के तहत वाहनों की आवाजाही को बिना रुके संचालित करने के लिए ट्रैफिक प्रबंधन के नए मॉडल का परीक्षण किया जा रहा है। पूर्वी दिल्ली के बिहारी कॉलोनी क्षेत्र में इसका ट्रायल शुरू कर दिया गया है, जहां यातायात प्रवाह, वाहन घनत्व और जाम की स्थिति का लगातार आकलन किया जा रहा है।
बिहारी कॉलोनी रेडलाइट पर ट्रायल शुरू हो चुका है। बाकी दोनों जगह जल बोर्ड की अंडरग्राउंड सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। वहां यू टर्न बनाए जा चुके हैं। काम पूरा होने के बाद इन्हें भी सिग्नल फ्री कर दिया जाएगा। इससे पहले विकास मार्ग को भी इसी तरह सिग्नल फ्री बनाया जा चुका है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, सड़क के बीच सीमेंटेड डिवाइडर लगाकर बिहारी कॉलोनी रेडलाइट बंद कर दी गई है।
रेडलाइट की जगह डिवाइडर और यू टर्न से नियंत्रित होगा ट्रैफिक
- अब बिहारी कॉलोनी से कांति नगर जाने वालों को यू टर्न लेना होगा, जबकि कांति नगर से बिहारी कॉलोनी जाने वालों को केशव चौक अंडरपास के ऊपर से घूमकर जाना पड़ेगा।रेडलाइट बंद होने से मुख्य मार्ग का ट्रैफिक बिना रुके आगे बढ़ सकेगा।
- ट्रायल के बाद रॉन्ग साइड चलने की समस्या बढ़ी है, जिसे रोकने के लिए 200 से ज्यादा चालान किए जा चुके हैं।
- वहीं, आजाद नगर रेडलाइट को सिग्नल फ्री बनाने की तैयारी पूरी है।
- दोनों तरफ यू टर्न बनाए जा चुके हैं। स्वर्ण सिनेमा के पास सीवर लाइन बिछाने का काम 30 जून तक पूरा होना है। इसके बाद रेडलाइट बंद कर दी जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य व्यस्त मार्गों पर लगने वाले लंबे जाम को कम करना, यात्रा समय घटाना और ईंधन की बचत सुनिश्चित करना है। ट्रायल के दौरान ट्रैफिक पुलिस और संबंधित एजेंसियां वाहनों की आवाजाही पर नजर रख रही हैं ताकि यह देखा जा सके कि सिग्नल-फ्री व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है। यदि परिणाम सकारात्मक रहे तो इस मॉडल को स्थायी रूप से लागू किया जा सकता है।
दयानंद मार्ग पूर्वी और मध्य दिल्ली को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है, जहां पीक आवर्स में भारी ट्रैफिक दबाव देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिग्नल-फ्री कॉरिडोर बनने से न केवल यातायात का दबाव कम होगा, बल्कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक संचालन की दक्षता में भी सुधार आएगा। हालांकि स्थानीय स्तर पर यातायात के नए पैटर्न को लेकर लोगों को कुछ समय तक बदलावों के अनुरूप ढलना पड़ सकता है।
दिल्ली में लगातार बढ़ते वाहन भार को देखते हुए यह परियोजना शहरी यातायात प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो राजधानी के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी इसी तरह की सिग्नल-फ्री व्यवस्था लागू की जा सकती है।