- डायरेक्टर पर्सनल ने नियमों के विरुद्ध सेक्शन ऑफिसर मुकेश बाबू को बनाया इंस्पेक्टर
- खून के आंसू रो रहा है एक लाख सत्तर हजार रुपए प्रतिमाह वसूली देने वाला दुकानदार न
नई दिल्ली । 20 जून 26 । एनडीएमसी उच्च अधिकारियों के स्तर पर करप्शन प्रैक्टिस ने बहुत गहराई तक जड़े जमा ली हैं। सरोजनी नगर मार्केट में मुकेश बाबू नामक इंस्पेक्टर द्वारा दुकानदारों और पटरी वालों से दबंगई से की जा रही लाखों रुपए की वसूली की एक वायरल वीडियो से यह बात प्रमाणित हो रही है।
इस वीडियो में एक दुकानदार अपने मोबाइल में कॉल डिटेल और रिकॉर्डिंग के आधार पर आरोप लगा रहा है कि इंस्पेक्टर मुकेश बाबू उससे एक लाख सत्तर हजार रुपए वसूल चुका है। दुकानदार के इस आरोप पर मुकेश बाबू कोई जवाब देने की बजाय मुँह छिपाता नजर आ रहा है।
लेकिन ये मुकेश बाबू है कौन और किसी दुकानदार से इतनी मोटी रकम की वसूली करने का हक इसे किसने दिया।
इस सवाल का जवाब NDMC द्वारा 7 जुलाई 2025 को जारी आदेश में साफ साफ लिखा है। इस आदेश के मुताबिक मुकेश बाबू, जोकि सेक्शन ऑफ़िसर के पद पर तैनात था, उसका तत्काल प्रभाव से मेडिकल विभाग में तबादला कर दिया गया। तबादला आदेश में साफ लिखा है कि यदि उसने नए पद पर ज्वाइन नहीं किया तो उसका वेतन रोक दिया जाएगा।
लेकिन NDMC के उच्चाधिकारियों की महिमा अपरम्पार है। इन्हीं अधिकारियों की शह पर मुकेश बाबू ने नए पद पर आज तक भी ज्वाइन नहीं किया और पहले की तरह आज भी बदस्तूर सरोजनी नगर मार्केट के दुकानदारों से जबरन हर महीने करोड़ों रुपए की वसूली कर रहा है। यह वीडियो इस बात का जीता जागता सबूत है कि उच्चाधिकारियों की शह पर ndmc में करप्शन की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।
सीधे तौर पर मुकेश बाबू को डायरेक्टर (पर्सनेल) ने कथित तौर पर इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया था। बताया जा रहा है कि यह नियुक्ति NDMC के नियमों और कानूनों के खिलाफ है। क्योंकि नियमानुसार एक सेक्शन ऑफिसर को इंस्पेक्टर बनाया ही नहीं जा सकता।
सवाल यह उठता है कि डायरेक्टर (पर्सनेल) ने किस आधार पर या किस लालच में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जो रिश्वत ले रहा है।