वॉशिंगटन, 19 जून् 2026 । अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance इस समय ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस डील की सफलता या विफलता वेंस के राजनीतिक भविष्य और 2028 की संभावित राष्ट्रपति पद की दौड़ पर सीधा असर डाल सकती है।
व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग से लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू तक, वेंस इस डील को डिफेंड करने की पूरी कमान संभाले हुए हैं। जब इस समझौते को लेकर इजराइल और अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से ही तीखी आलोचना शुरू हुई, तो वेंस ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें अमेरिका-ईरान समझौते के लिए ‘बलि का बकरा’ बना दिया है। इस पर वेंस ने कहा कि उन्हें लगता है कि ट्रम्प मजाक कर रहे थे।
दरअसल, एक दिन पहले ट्रम्प ने कहा था कि अगर यह समझौता विफल हो जाता है तो वह इसका दोष वेंस पर डाल सकते हैं। हाल के महीनों में वह कई बार ऐसा बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईरान के साथ हुआ समझौता कामयाब होता है तो वे 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के सबसे बड़े दावेदार हो सकते हैं।
समझौते के तहत ईरान के यूरेनियम संवर्धन, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। वेंस का कहना है कि किसी भी प्रतिबंध राहत या आर्थिक लाभ से पहले ईरान को अपने दायित्वों का पालन करना होगा।
हालांकि, इस डील को लेकर अमेरिकी राजनीति में मतभेद भी सामने आए हैं। रिपब्लिकन पार्टी के कुछ कड़े रुख वाले नेताओं और सुरक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि समझौता ईरान को रणनीतिक लाभ दे सकता है। वहीं समर्थकों का कहना है कि कूटनीतिक समाधान युद्ध की तुलना में बेहतर विकल्प है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यदि यह समझौता सफल रहता है, ईरान अपने वादों का पालन करता है और मध्य-पूर्व में तनाव कम होता है, तो वेंस की छवि एक प्रभावी कूटनीतिक नेता के रूप में मजबूत हो सकती है। लेकिन यदि वार्ता विफल होती है या समझौता टूट जाता है, तो इसका राजनीतिक नुकसान भी उन्हें ही सबसे अधिक उठाना पड़ सकता है।