मां के साथ खेत में उतरे मुख्यमंत्री धामी: खटीमा में चलाया टिलर, किसानों और युवाओं को दिया आत्मनिर्भरता का संदेश
उत्तराखंड , 15 जून् 2026 । उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने गृह क्षेत्र खटीमा में मां के साथ खेतों में पहुंचकर टिलर चलाया और खेती-किसानी से जुड़ाव का संदेश दिया। मुख्यमंत्री का यह सादगीपूर्ण अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। खेत में काम करते हुए उन्होंने कृषि को राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का आधार बताते हुए किसानों के योगदान की सराहना की।
इस दौरान उनकी माता बिशना देवी भी उनके साथ उपस्थित रहीं। सीएम ने खेत में श्रम करते हुए किसानों के परिश्रम और कृषि परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खेती केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मा है। आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर कृषि को अधिक समृद्ध एवं टिकाऊ बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने युवाओं से कृषि और उससे जुड़े आधुनिक व्यवसायों की ओर आकर्षित होने का आह्वान किया। उनका कहना था कि तकनीक और नवाचार के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
खटीमा स्थित अपने पैतृक गांव में मां के साथ खेत में काम करते हुए मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि चाहे व्यक्ति किसी भी पद पर पहुंच जाए, उसे अपनी जड़ों और पारंपरिक मूल्यों से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने किसानों की मेहनत को देश की खाद्य सुरक्षा का आधार बताते हुए कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया।
युवा पीढ़ी को भी खेती और ग्रामीण विकास से जोड़ना
सीएम ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान कृषि, ग्रामीण संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी हुई है। राज्य सरकार पारंपरिक खेती, बागवानी, प्राकृतिक कृषि और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को सहायता उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भी खेती और ग्रामीण विकास से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री की यह तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इसे किसानों के प्रति सम्मान और ग्रामीण जीवन से जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संदेश ग्रामीण समाज और कृषि क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं।