बिहार का ‘बदलापुर’ बना झारखंड राज्यसभा चुनाव, RJD ने वीडियो शेयर कर कांग्रेस के सियासी गुनाह गिनाए

पटना/रांची, 19 जून्‌ 2026 । झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर सियासी तनाव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक वीडियो जारी कर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला दिया और कई ऐसे फैसलों को याद दिलाया, जिन्हें पार्टी ने अपने साथ हुए राजनीतिक अन्याय के रूप में पेश किया। इस घटनाक्रम ने झारखंड की एक सीट के चुनाव को बिहार की राजनीति से जोड़ते हुए ‘बदलापुर’ की सियासत का रंग दे दिया है।

‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर की कड़वाहट को उजागर कर दिया है। कांग्रेस द्वारा राजद और भाकपा-माले पर भितरघात के आरोप लगाने के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। राजद ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए इस पूरे घटनाक्रम को बिहार के ‘बदलापुर’ से जोड़ दिया है।

बिहार का ‘बदलापुर’ बना झारखंड

इसी ट्वीट में बिहार के कांग्रेस के विधायकों के बारे में भी आरजेडी ने लिखा है, जिनके चलते वो राज्यसभा चुनाव हार गई थी। इसके साथ ही उन तीनों विधायकों का वीडियो भी शेयर किया है। साथ ही लिखा है, ‘यही नहीं उन विधायकों ने खुलकर कैमरा पर आकर कहा कि महागठबंधन का उम्मीदवार उनकी पसंद का नहीं था, उनके शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें कोई निर्देश नहीं दिया इत्यादि इत्यादि। सबूत के तौर पर वीडियो संलग्न है। अब तक उन विधायकों के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई की गई?

RJD का आरोप है कि कांग्रेस ने कई मौकों पर सहयोगी दलों की भावनाओं और राजनीतिक हितों की अनदेखी की। वीडियो में विभिन्न चुनावी और गठबंधन संबंधी घटनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस के कथित ‘सियासी गुनाह’ गिनाए गए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक रिश्तों में विश्वास और सम्मान जरूरी है, लेकिन अतीत में कई बार ऐसे फैसले लिए गए जिनसे सहयोगियों को नुकसान हुआ।

दूसरी ओर, कांग्रेस इस पूरे विवाद को अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी बता रही है। पार्टी का कहना है कि गठबंधन की मजबूती और भाजपा के खिलाफ साझा लड़ाई प्राथमिकता है। हालांकि, RJD की ओर से उठाए गए सवालों ने महागठबंधन के भीतर मौजूद असहजता को सार्वजनिक कर दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड राज्यसभा चुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह सहयोगी दलों के बीच शक्ति संतुलन, राजनीतिक संदेश और भविष्य की रणनीति का भी मंच बन गया है। बिहार और झारखंड की राजनीति में इसका असर आने वाले चुनावों तक देखने को मिल सकता है।

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