नई दिल्ली, 17 जून् 2026 । दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना कई लोगों की जिंदगी बचाने वाले एक बिहार के रहने वाले 26 साल के रोहित की जिंदगी उस हादसे के बाद से पूरी तरह बदल गई है। आग की लपटों के बीच लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने वाले इस शख्स की हालत आज ऐसी हो गई है कि वह आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हुए दाने-दाने का मोहताज हो गया है।
रोहित के साथ उस वक्त उनके गांव के दो साथी भी ड्यूटी पर थे। दोनों ऊपर काम कर रहे थे। आग लगने पर रोहित उन दोनों को बचाने के लिए ऊपर पहली मंजिल पर भागे। आग में फंसने के बाद तीनों ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और सुरक्षित बाहर कूदने से पहले बाथरूम की बाल्टी से खिड़की तोड़ दी। रोहित ने पक्का किया कि उसके साथी पहले बाहर निकलें। इसके बाद वह सबसे आखिर में नीचे कूदे।
अग्निकांड के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए इस व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी। इलाज के दौरान डॉक्टरों को उसकी रीढ़ को सहारा देने के लिए मेटल रॉड लगानी पड़ी। लंबे समय तक चले उपचार और शारीरिक अक्षमता के कारण वह नियमित रोजगार करने में असमर्थ हो गया। इसके चलते परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस व्यक्ति ने संकट की घड़ी में दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी, आज वही व्यक्ति पर्याप्त आर्थिक सहायता और सामाजिक सहयोग का इंतजार कर रहा है। इलाज, दवाइयों और रोजमर्रा के खर्चों ने परिवार पर भारी बोझ डाल दिया है।
परिजनों का कहना है कि शुरुआत में कुछ मदद जरूर मिली, लेकिन समय के साथ सहायता कम होती गई। अब परिवार के सामने जीवनयापन और इलाज दोनों की चुनौती खड़ी है। समाजसेवियों का मानना है कि ऐसे लोगों को विशेष सहायता और सम्मान मिलना चाहिए, जिन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए असाधारण साहस का परिचय दिया।
यह मामला उन अनसुने नायकों की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है, जो आपदा के समय आगे बढ़कर लोगों की मदद करते हैं, लेकिन बाद में खुद संघर्षों से घिर जाते हैं। कई लोगों ने सरकार और सामाजिक संगठनों से इस व्यक्ति की मदद के लिए आगे आने की अपील की है, ताकि उसके इलाज और परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।